ज्यूरी। अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव शिमला-2026 में आयोजित हिंदी कवि गोष्ठी में लेखक एवं कवि सिकंदर बंसल ने अपनी कविता से श्रोताओं को प्रभावित किया। उन्होंने कविता सिकंदर मेरे बारे में भी कहना... का पाठ किया। इस कविता में सतलुज नदी की पीड़ा और पर्यावरणीय संकट को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। रामपुर बुशहर से संबंध रखने वाले सिकंदर बंसल को जिला प्रशासन शिमला ने इस प्रतिष्ठित गोष्ठी के लिए आमंत्रित किया था। वह वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अंग्रेजी प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। उनकी कविता ने हिमालयी पारिस्थितिकी पर बढ़ते खतरों को भी उजागर किया। कविता ने सतलुज को मानवीय स्वर देते हुए उसकी वेदना और अस्तित्व की चिंता को दर्शाया। यह प्रस्तुति प्रकृति संरक्षण और विकास-पर्यावरण संतुलन का सशक्त संदेश थी। उपस्थित साहित्यकारों, कवियों और श्रोताओं ने कविता की खूब सराहना की। सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।