गड्ढों से भरी सड़क में हादसों का बढ़ा खतरा, जलभराव से राहगीर झेल रहे परेशानी
. निकासी की उचित व्यवस्था न होने से ग्रामीणों में रोष
. सेब सीजन से पूर्व सड़क की हालत सुधारने की उठी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुमारसैन (रामपुर बुशहर)।
कुमारसैन की बड़ागांव पंचायत में शिवान से सराहन गांव को जोड़ने वाली खस्ताहाल सड़क से ग्रामीण परेशान हैं। करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क खस्ताहाल में है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी टारिंग और सड़क पर बिखरे पत्थरों के कारण इस मार्ग पर वाहन चलाना जोखिमभरा बना हुआ है। बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय निवासी प्रवेश नलवा, राजेश नलवा, विपul मेहता, सितु वर्मा, बलवंत चौहान और नमन वर्मा ने कहा कि सड़क की लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। साथ ही सड़क के किनारे बनी नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से बारिश का पानी सड़क पर ही बहता रहता है, जिससे सड़क तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही है। कई स्थानों पर पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण सड़क पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस सड़क से रोजाना हजारों ग्रामीण, विद्यार्थी, किसान, बागवान, मरीज और अन्य यात्री आवाजाही करते हैं। सेब सीजन के दौरान बागवानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सड़क की खराब हालत के कारण वाहनों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना हुआ है। सरकार और संबंधित विभाग समय-समय पर सड़कों के रख-रखाव और नालियों के निर्माण एवं सफाई के बड़े-बड़े दावे करते हैं ताकि बारिश के पानी की सुचारु निकासी हो सके। सड़क पर न तो पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था है और न ही नियमित रखरखाव किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़कों के रखरखाव के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जाने वाली राशि का सही ढंग से उपयोग नहीं हो रहा है। यदि समय रहते सड़क की मरम्मत, गड्ढों को भरने और नालियों की सफाई का कार्य नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग और प्रदेश सरकार से मांग की है कि शिवान-सराहन सड़क की जल्द हालत सुधारी जाए। साथ ही सड़क किनारे नालियों की सफाई एवं पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।