रोहड़ू के युवा चित्रकार की पेंसिल में गजब की कला
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। विरासत में मिली कला को निखारने का जज्बा हो, तो कलाकार की कला फिर किसी पहचान की मोहताज नहीं हाेती। रोहड़ू उपमंडल की दूरदराज पंचायत रोहल के मंजवाड़ी गांव के एक ऐसे ही युवा चित्रकार हैं दिव्यांशु घंखवाण। शहर में इनकी चित्रकारी का हर कोई मुरीद है। 19 वर्ष की आयु में दिव्यांशु अपनी चित्रकारी से सभी को मोहित कर लेता है। दिव्यांशु ने कभी पेंटिंग नहीं सीखी है। वह अपने घर पर सीमित संसाधनों का इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति की तस्वीर को चंद मिनटाें में कागज पर उतार देता है। दिव्यांशु को यह कला विरासत मे मिली है। दिव्यांशु के पिता केदार नाथ देवता पवासी के करीगर व शिल्पकार है। वहीं, दादा हुम्मा नंद भी अच्छे शिल्पकार रहे हैं। दिव्यांशु ने बताया कि अपने पिता को काम करते देख मैंने भी चित्रकारी करना शुरू की। सबसे पहले अपनी ही फोटो को पेंसिल से कागज पर उतारा। अब में अपने दोस्तों व अन्य घटनाओं को तस्वीर का रूप दे रहा हूं। अभी मेरी स्नातक की पढ़ाई पूरी होने जा रही है। उसके बाद फाइन आर्ट के क्षेत्र में कॅरिअर बनाउंगा।
दिव्यांशु द्धारा बनाई की पेटिंग