किन्नौरी महिलाओं के पारंपरिक परिधान दोडु की तेजी से बढ़ रही मांग। संवाद
आधुनिकता के दौर में भी लोक संस्कृति को संजोये हुए है किन्नौर जिले की पारंपरिक वेशभूषा
देवकला नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले की पारंपरिक वेशभूषा आधुनिकता के दौर में भी लोक संस्कृति को संजोये हुए है। इन दिनों किन्नौरी महिलाओं के पारंपरिक परिधान पश्मीना दोडु की मांग तेजी से बढ़ रही है। दोडु यहां का पारंपरिक परिधान है, लेकिन नई पीढ़ी की युवतियों में इस परिधान का खासा क्रेज देखने को मिल रहा है। इस विशेष पश्मीना दोडु की अधिकतम कीमत 25 हजार रुपये तक है। इसके बॉर्डर पर या फिर चार इंच या नौ इंच के फासले पर कई तरह के डिजाइन किए जाते हैं, जो इसकी खूबसूरती को चार चांद लगाते हैं।किन्नौर में महिलाएं स्लेटी, सफेद और काले रंग के दोडु पहना करती थीं। समय के साथ फैशन में बदलाव आया। अब एक बार फिर सफेद रंग के पुरानी शैली के परिधान को युवतियां पसंद कर रहीं हैं। मन्नत हथकरघा कल्पा के संचालक सनम दर्जे जितस ने बताया कि वह 35 से 40 साल से हथकरघा का काम कर रहे हैं। सभी प्रकार के किन्नौरी पारंपरिक वस्त्र बनाते हैं। पुराने समय में सफेद रंग के दोडु की अधिक मांग थी। इसके बाद अलग-अलग रंगों के दोडु भी लोकप्रिय हुए। जितस ने कहा कि अब युवतियां पुराने समय के सफेद रंग की दोडु के पैटर्न पर आधारित पश्मीना दोडु को पसंद कर रहीं हैं। साथ ही विभिन्न प्रकार के डिजाइन वाले दोडु पहनने का रुझान बढ़ा है। ग्राहक अंगूरा लगे और स्थानीय बोली के ''छोम-छोम'' शब्द वाले डिजाइन की पश्मीना दोडु की विशेष रूप से मांग कर रहे हैं।