कोटखाई (रोहड़ू)। कोटखाई उपमंडल के अढैवग डोम देवता खांटा का बल्टी शांत महायज्ञ सोमवार को देव विदाई के साथ संपन्न हो गया। अनुष्ठान में पहुंचे देवी-देवता ग्रामीणों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर लौट गए। वर्ष 1969 के बाद करीब 65 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस शांत महायज्ञ में क्षेत्र के चार प्रमुख देवताओं के साथ खूंदों की सहभागिता रही। महायज्ञ में कोटेश्वर महादेव मिहाणी, डोम देवता खांटा बशनोग (ठियोग), नाग देवता भमराड़ा, काली माता टिक्करी हिमरी और खूंद थनाल गांव थाना ने भाग लिया। तीन दिन तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सोमवार को समापन पर सभी देवी-देवताओं को विधिवत विदाई की गई। विदाई से पहले देवी-देवताओं और खूंदों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इसके बाद सभी देवी-देवताओं के गूरों ने शांत महायज्ञ के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए क्षेत्र की जनता को सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजन के सफल संपन्न होने के लिए कमेटी ने सभी का आभार व्यक्त किया है।
अढैवग डोम देवता खांटा का बल्टी शांत महायज्ञ से लौटते देवता। संवाद