फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rampur Bushahar News: ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवलुओं संग महिलाओं ने डाली नाटी

विज्ञापन
नोग वैली स्थित बाहली के टरू नारायण मंदिर में देव अधिष्ठाता दमुख डंसा से आशीर्वाद लेते ग्रामीण। 
विज्ञापन
नोग वैली के टरू नारायण मंदिर में देवता साहिब दमुख के सानिध्य में सजा मेला
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। रामपुर उपमंडल की नोगवैली स्थित बाहली के टरू नारायण मंदिर में बुधवार को देव अधिष्ठाता प्रमुख देवता साहिब दमुख के सानिध्य में पारंपरिक मेला धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान प्राचीन देव परंपराओं का निर्वहन करते हुए देवलुओं, महिलाओं और पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नाटी डाली। दिनभर मंदिर परिसर में देव संस्कृति और पहाड़ी लोक परंपराओं की छटा देखने को मिली। मंगलवार शाम को देवता साहिब दमुख अपने लाव-लश्कर और देवलुओं के साथ सनेई गांव पहुंचे थे। इसके बाद बुधवार को देवता ने बाहली स्थित टरू नारायण मंदिर में शिरकत की। देवता के आगमन के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ गई और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मेले का आयोजन किया गया। टरू नारायण मंदिर में लगने वाले इस मेले की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह मेला विशेष रूप से फुआलों के कंडे से भेड़ों की घर वापसी से जुड़ा माना जाता है। पहले मेले में बड़ी संख्या में गड़रिये अपनी भेड़ों के साथ पहुंचते थे, लेकिन बदलते समय के साथ अब इक्का-दुक्का गड़रिए ही मेले में पहुंच रहे हैं। इसके चलते मेले का स्वरूप भी धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। परशुराम मंदिर समिति के प्रधान खेल चंद नेगी और महासचिव जीएल डमालू ने कहा कि बदलती जीवनशैली और रोजमर्रा के कार्यों में बढ़ती व्यस्तता भी मेले की घटती महत्ता का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि प्राचीन देव परंपराएं और पहाड़ी संस्कृति क्षेत्र की पहचान हैं। इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें