नोटिस की प्राप्ति की तारीख साबित न होने पर अदालत ने शिकायत को माना समय से पहले दायर
संवाद न्यूज़ एजेंसी
रामपुर बुशहर।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी कुशल सिंह को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रोहड़ू की ओर से 2 जुलाई 2025 को सुनाई गई छह माह के साधारण कारावास और 2.04 लाख रुपये जुर्माने की सजा को रद कर दिया। अदालत ने पाया कि मामले में कानूनी नोटिस की प्राप्ति की वास्तविक तारीख साबित नहीं हुई और शिकायत निर्धारित कानूनी अवधि पूरी होने से पहले दायर की गई थी। मामले के अनुसार, कुशल सिंह ने अक्तूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक से भूमि विकास योजना के तहत तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की अदायगी पांच वर्षों में अर्धवार्षिक किस्तों के माध्यम से होनी थी। बैंक के अनुसार, बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 2,03,953 रुपये का चेक जारी किया, जो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने डाक से कानूनी नोटिस भेजा और भुगतान न होने पर शिकायत दायर की। आरोपी ने दावा किया था कि बैंक ने ऋण देते समय उससे खाली सुरक्षा चेक लिया था। हालांकि, अदालत में अपील का फैसला इस आधार पर हुआ कि नोटिस भेजे जाने के बाद उसकी प्राप्ति की वास्तविक तारीख का कोई विश्वसनीय प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में नोटिस की सेवा के लिए 30 दिन की अवधि मानने के बाद आरोपी को भुगतान के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाना आवश्यक था। अदालत ने पाया कि बैंक ने 18 जनवरी 2022 को शिकायत दायर की थी, जो निर्धारित कानूनी अवधि पूरी होने से पहले थी। इसलिए शिकायत समय से पहले दायर मानी गई और दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती थी।