हर महीने आठ टन नहीं गलने वाले सूखा कचरा उठा कर चल रही कई परिवारों की आजिविका
रतन चौहान
रोहड़ू। नगर परिषद रोहड़ू में घर-घर से सूख-गीला कचरा उठाने की योजना के अब सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इसका असर भी अब कस्बे के बाजार में दिख रहा है। बाजार की नालियां और गलियां अब पहले से अधिक साफ नजर आ रही है। वहीं डंपिंग साइट पर कूड़े के ढेर भी घटना शुरू हो गए हैं। सूखा और गीला कचरा उठने के बाद इसकी छंटाई के कार्य से क्षेत्र के कई परिवारों की आजीविका चल रही है। रोहड़ू बाजार से नगर परिषद की पहल के बाद सूखा और गीला कचरा घर-घर से एकत्रित की योजना एक महीने पहले शुरू हुई। अब रोहड़ में हर महीने में नगर परिषद के सात वार्डों से करीब आठ टन नहीं गलने वाला एकत्रित कर रिसाइकल के लिए भेजा गया है। इसमें गत्ते के अलावा सबसे अधिक मात्रा में प्लास्टिक के टीन और कांच शामिल हैं। नगर परिषद के सूखे कचरों को छांटकर कबाड़ के कारोबार से जुड़े कई परिवाराें को आजीविका चल रही है। छंटाई में जुडे लोग दिनभर एकत्र कचरे को ट्रकों में रिसाइकल के लिए शहरों को भेज रहे हैं। इससे पहले रोहडू में सूखा और गीला कचरा एक साथ नगर परिषद के डंपर में भरकर नदी के तट पर ठिकाने लगाया जाता था। पब्बर से कई उठाऊ पेयजल योजनाएं चल रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कई बार नगर परिषद को नोटिस तक जारी किए गए। नगर परिषद रोहड़ू में नए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की ताजपोशी के बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर की गई पहल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। पब्बर नदी के जल प्रदूषण की संभावनाएं घटती जा रही है। नगर परिषद रोहड़ू के अध्यक्ष अशोक चाैहान और उपाध्यक्ष सुजय अग्रवाल का कहना है कि इस पहल को ट्रायल के तौर पर डेढ़ महीने पहले सख्ती से शुरू किया गया। परिणाम सकारात्मक मिलेंगे तो शहर को और साफ-सुधरा बनाने का प्रयास रहेगा। उन्होंने कहा कि करीब आठ टन लोहा, प्लास्टिक और गत्ते का कचरा एक महीने में एकत्र करके ट्रकों से रिसाइकल के लिए भेजा गया है। इसके अलावा कई टन कांच अलग से उठाकर बाहर भेजा जा रहा है। कचरे को उठाकर कई परिवार आजीविका कमा रहे हैं। नगर परिषद इसकी एवज में उनसे कोई चार्ज नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि कस्बे को साफ रखने में शहर के आम नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है।