कई वर्षों से फार्मासिस्ट, नर्स और लैब तकनीशियन के पद रिक्त, लोगों ने से रिक्त पदों को भरने की उठाई मांग
अस्पताल में बढ़ रही मरीजों की संख्या लेकिन स्टाफ की कमी पड़ रही भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय रिकांगपिओ में स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टाफ की कमी की मार क्षेत्र के हजारों मरीजों पर भारी पड़ रही है। अस्पताल में फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन के अलावा कई अन्य पद रिक्त चल रहे हैं। इस वजह से क्षेत्र के लोग घरद्वार पर बेहतर उपचार की सुविधा से महरूम हैं। गौर हो कि आयुर्वेद चिकित्सालय रिकांगपिओ वर्ष 1978 में खोला गया। उस समय यहां पर फार्मासिस्ट के तीन पद स्वीकृत थे लेकिन यहां मात्र एक ही फार्मासिस्ट की तैनाती की गई, जबकि अभी तक दो फार्मासिस्ट के पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं लैब तकनीशियन का पद वर्ष 1998 से रिक्त चल रहा है। वहीं स्टाफ नर्स के तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यह तीनों पद वर्ष 2001 से खाली चल रहे हैं। एएनएम के दो पद वर्ष 2018 से रिक्त, वार्ड बवॉय का एक पद वर्ष 2005 से रिक्त है जबकि अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीते वर्ष अस्पताल में करीब 7,600 मरीजों की ओपीडी रही। वहीं इस वर्ष करीब 9,800 मरीजों की ओपीडी हो चुकी है। इसके अलावा पंचकर्मा के लिए दो फीमेल और दो मेल हेल्थ वर्कर के पद लंबे समय रिक्त चल रहे हैं। चिकित्सालय में इस वर्ष अभी तक 1,094 मरीजों का पंचकर्मा हो चुका है, वहीं बीते वर्ष 605 मरीजों का पंचकर्मा हुआ था लेकिन अस्पताल में खाली पदों की मार मरीजों पर पड़ रही है। प्रधान रोघी पंचायत रतन मंजरी नेगी, प्रधान कल्पा पंचायत सरिता नेगी, प्रधान दुनी पंचायत दिवान नेगी, प्रधान कोठी ओमप्रकाश नेगी, युवारंगी पंचायत प्रधान गंगा देवी नेगी, प्रधान ख्वांगी पंचायत सत्या देवी नेगी, प्रधान पांगी पंचायत कालजंग नेगी और चांसू पंचायत प्रधान बीरबल लोक्ट्स ने सरकार और विभाग से जल्द रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई है, जिससे हजारों मरीजों को घरद्वार बेहतर उपचार मिल सके। भाजपा जिला अध्यक्ष यशवंत सिंह नेगी ने कहा कि कांग्रेस सरकार एक साल का जश्न मनाने की तैयारी में जुटी हुई है, जबकि विभिन्न विभागों में खाली पदों को भरने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। जिला आयुष अधिकारी डॉ. इंदु शर्मा ने बताया कि खाली पदों का मामला सरकार के ध्यान में हैं। अस्पताल में बेहतर उपचार की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। अगर खाली पदों को सरकार भरेगी तो अस्पताल में मरीजों को और बेहतर उपचार की सुविधा मिलेगी।