बगीचों को संवारने के कार्य ने पकड़ी रफ्तार, बारिश के बाद तौलिये बनाने का काम होगा शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सूबे के निचले क्षेत्रों में बागवान प्लम की काटछांट के कार्य में जुट गए हैं। कई स्थानों पर प्लम के पेड़ों की काटछांट के कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। रामपुर उपमंडल के रचोली, रतनपुर, गसो, कोटगढ़, राजपुरा, खनोटू, खखरोला, स्विचयार्ड, तलाई, निरसू और दत्तनगर सहित अन्य निचले क्षेत्रों में बागवानों ने प्लम के पेड़ों की काटछांट का कार्य शुरू कर दिया है। पेड़ों की काटछांट के बाद बागवान पेस्टिंग का कार्य शुरू करेंगे, जिससे पेड़ों को कैंकर रोग से बचाया जा सके। वहीं, बारिश के बाद बगीचों में तौलिये बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में सेब के बाद निचले क्षेत्रों में प्लम बागबानों की मुख्य फसल है। सेब के साथ-साथ प्लम की फसल तैयार कर लोअर बेल्ट के बागवान आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, जहां दशकों से सेब ने अपनी बादशाहत कायम की है, वहीं अब कुछ वर्षों से निचले क्षेत्रों में बागवानों का प्लम की विभिन्न वैरायटी तैयार करने की ओर भी रुझान बढ़ रहा है। सेब के बगीचे तैयार करने में काफी खर्च आता है। वहीं प्लम के बगीचे तैयार करने में सेब की अपेक्षा बागवानों को कम खर्च वहन करना पड़ता है। ऐसे में बागवान निचले क्षेत्रों में प्लम के बगीचे तैयार करने में दिलचस्पी ले रहे हैं। प्रगतिशील आनंद नेगी, सरस्वती ठाकुर, रणजीत चौहान, शेरसिंह, राकेश, विनोद, योग राज, राधाकृष्ण, हेमराज और रजनीकांत सहित अन्य बागवानों ने कहा कि इन दिनों प्लम के पेड़ों की काटछांट का कार्य जोरों पर चला हुआ है। कटिंग के बाद जहां जरूरत होगी, टहनियों में पेस्ट लगाया जाएगा। एसएमएस डॉ. अश्वनी चौहान ने कहा कि पेड़ों में पतझड़ के बाद बागवान काटछांट का कार्य कर सकते हैं। जिन क्षेत्रों में पेड़ों में पत्ते नहीं झड़े हैं, उन क्षेत्रों में बागवान अभी संयम बरतें।