रोहडू़ में आयोजित बैठक में मांगों और समस्याओं को लेकर विस्तार से की चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू की बैठक रविवार को रोहडू़ में आयोजित हुई। बैठक में वर्कर्स ने आरोप लगाया गया कि मिड-डे मील वर्कर्स को समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने हरियाणा की तर्ज पर सात हजार रुपये वेतन की मांग की। इसके साथ ही माननीय हिमाचल उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार और पंजाब सरकार की तर्ज पर दस के स्थान पर 12 महीने का वेतन भी सरकार से मांगा। पंजाब सरकार के मिड-डे मील वर्कर्स और हिमाचल में आंगनबाड़ी की तरह 12 से 20 छुट्टियों की सुविधा दी जाए। इसके अलावा साल में दो वर्दी मल्टी टास्क भर्ती में मिड-डे मील कर्मियों को प्राथमिकता, अतिरिक्त कार्य का अतिरिक्त वेतन, बंद किए गए स्कूलों में अन्य स्टाफ की तरह मिड-डे मील कर्मियों को दूसरे स्कूलों में समायोजित करने, उनके लिए नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त को हटाने की मांग भी रखी गई। बैठक में वर्कर्स ने चुनाव के समय पोलिंग पार्टी को खाना बनाने का कार्य न करवाने का मुद्दा भी रखा। इसके अलावा प्रत्येक स्कूल में अनिवार्य रूप से दो मिड-डे मील वर्कर्स की नियुक्ति करने, 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार मिड-डे मील कर्मियों को मजदूर का दर्जा देकर नियमित करने की मांग भी रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 45वें श्रम सम्मेलन की शर्त के अनुसार योजना मजदूरों को मजदूर का दर्जा देने, पेंशन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य आदि सुविधा को लागू नहीं कर रही है। केंद्र ने वर्ष 2009 के बाद मिड-डे मील कर्मियों के वेतन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की है। केंद्र उनकी योजना के बजट में लगातार कटौती कर रही है। मोदी सरकार ने मिड-डे मील योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना करके सुनियोजित साजिश रची है। सरकार मिड-डे मिल योजना में केंद्रीय रसोई घर और डीबीटी शुरू कर रही, जिसे मिड-डे मील कर्मियों की छंटनी तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मिड-डे मील कर्मियों का रोजगार खत्म करना चाहती है। इस बैठक का आयोजन यूनियन के उपाध्यक्ष सुनील मेहता राजमिला सुरेखा ने किया। इस दौरान डोडरा क्वार छौहारा कमेटी ने आम सहमति से अध्यक्ष सुनीता नेगी और महासचिव लीला ठाकुर को चुना।