संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला की ओर से राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सौजन्य से महामेदा एवं अन्य समशीतोष्ण क्षेत्र के महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की नर्सरी और खेती के बारे में कृषिकरण ग्रामीण आय की वृद्धि एवं विविधिकरण के लिए लोगों को जागरूक किया गया। एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्थानीय ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों और किसानों के साथ करीब 35 लोगों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ संदीप शर्मा, निदेशक हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला ने किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कई बहुमूल्य जड़ी-बूटियों से संपन्न प्रदेश है। जैविक एवं अजैविक दबाव के कारण कई बहुमूल्य जड़ी-बूटियां लुप्त होने के कगार पर है। जड़ी-बूटियों का संरक्षण एवं बचाव आमदनी को बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने संस्थान की ओर से औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण संबंधित शोध कार्यों के बारे में भी अवगत कराया। संस्थान वैज्ञानिक डाॅ जगदीश सिंह ने प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया और संस्थान की ओर से चलाई जा रही विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। डाॅ संदीप शर्मा ने औषधीय पौधों के सोसायटी पंजीकरण और प्रमाणीकरण के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने औषधीय पौधों जैसे महामेदा, वनककड़ी, कडू, पतीश और जटामांसी को उगाने की आदर्श प्रथाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान की। उन्होंने क्षेत्र के महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की नर्सरी एवं खेती ग्रामीण आय की वृद्धि एवं विविधिकरण के लिए एक विकल्प विषय पर प्रस्तुति भी दी। डाॅ जगदीश सिंह ने हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान, शिमला ने समशीतोष्ण के औषधीय पौधों की नर्सरी एवं कृषिकरण विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया की संस्थान की ओर से पहले से ही कडु, बनककड़ी, चोरा और जटामांसी आदि औषधीय पौधों की किस्म भी विकसित की गई है। इस अवसर पर लोगों को मिशन लाइफ के बारे में भी जागरूक किया गया।