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Rampur Bushahar News: किन्नौर के शिपकिला से शुरू की जाए कैलाश मानसरोवर यात्रा

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शिपकिला बॉर्डर से दो दिन में पूरी होती है धार्मिक तीर्थ यात्रा, यात्रियों को दुर्गम रास्तों से भी नहीं पड़ेगा गुजरना
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नई सरकार बनते ही संसद में जोर शोर से उठाएंगे मुद्दा : जियालाल

संवाद न्यूज एजेंसी

रिकांगपिओ (किन्नौर)। भगवान शिव के सबसे ऊंचाई पर स्थित धार्मिक स्थल कैलाश मानसरोवर के लिए किन्नौर जिले से यात्रा शुरू करने की मांग वर्षों से उठ रही है। जनजातीय जिले के लोग वर्षों से शिपकिला होते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने की केंद्र सरकार से गुहार लगा रहे हैं। यहां से यात्रा की सुगमता, कम दूरी और जिले के लोगों की आर्थिकी को देखते लोग इस मांग को उठा रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा किन्नौर से शुरू करने के लिए जिले के लोग केंद्र में नई सरकार बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा अभी दो रास्तों से करवाई जा रही है। किन्नौर के लोगों ने केंद्र सरकार से पहले भी मांग की थी कि जिले के पूह खंड के नमज्ञा गांव से शिपकिला होते हुए यह यात्रा सिर्फ दो से चार दिन में पूरी की जा सकती है। अगर केंद्र सरकार इस यात्रा को बहाल करने की इजाजत दे तो किन्नौर की अर्थव्यवस्था में भी यह बड़ा परिवर्तन ला सकती है। अभी कैलाश मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से पैदल और दुर्गम रास्ते से होकर करवाई जाती है। इसके चलते कई बार यात्रियों के लिए यह जोखिमों भरी रहती है। वहीं दूसरी ओर सिक्कम के नाथुला से कैलाश मानसरोवर यात्रा को केंद्र सरकार ने करीब तीन वर्ष पूर्व शुरू किया है, लेकिन यहां से भी यात्रा को पूरा करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कैलाश मानसरोवर हिंदू और बौद्ध धर्मों का अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। इसके दर्शन के लिए हर वर्ष हजारों की संख्या में यात्री उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से कैलाश मानसरोवर जाते हैं। बताते चलें कि किन्नौर से कैलाश मानसरोवर यात्रा बहुत ही सुगम है और यहां से समय की भी बचत होती है। सतलुज नदी की उद्गम झील मानसरोवर के निकट राक्षस ताल झील है और चीन ने इस झील तक सड़क का निर्माण किया है। वहीं भारत सरकार ने पूह खंड के नमज्ञा गांव से शिपकिला तक सड़क का निर्माण किया है। ऐसे में अगर यहां से यात्रा शुरू होती है, तो यात्रियों की काफी सहुलियत मिलेगी। हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली और चंडीगढ़ के तीर्थ यात्रियों के लिए यह लाभदायक होगी। जिला वन अधिकार समिति किन्नौर के अध्यक्ष जियालाल नेगी ने बताया कि केंद्र सरकार ने करीब तीन वर्ष पूर्व किन्नौर से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन किसी कारणवश इसे मंजूरी नहीं मिली। नमज्ञा से शिपकिला बॉर्डर होते हुए यह यात्रा दो दिन में पूरी की जा सकती है। दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद किन्नौर के लोग अपने संसदीय प्रतिनिधियों के माध्यम से यह मामला फिर संसद में जोरशोर से उठाएंगे।
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