शिक्षकों के अभाव में निरमंड और रामपुर के स्कूलों में पढ़ाई के लिए जाने को मजबूर विद्यार्थी
स्कूल में सात शिक्षकों के पद खाली, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
ईशिका गौतम
रामपुर बुशहर। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने और गुणात्मक शिक्षा देने के दावे तो कर रही है, लेकिन बिना शिक्षक छात्रों का भविष्य कैसे सुधरेगा, ये सवाल अब भी उठ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आज भी अच्छी शिक्षा के लिए कोसों दूर जाना पड़ रहा है, जिससे सरकार के बेहतर शिक्षा के दावे हवा होते नजर आ रहे हैं। निरमंड उपमंडल की वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जाओं भी कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। यहां शिक्षकों के अभाव में विद्यार्थी दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने को मजबूर हैं जबकि गरीब तबके के विद्यार्थी शिक्षकों के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं। निरमंड विकास खंड की वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जाओं में वर्षों से अहम विषयों के शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में क्षेत्र की तीन पंचायतों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। स्कूल में शिक्षक न होने से छात्रों को निरमंड और रामपुर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इससे जहां विद्यार्थियों और अभिभावकों में रोष है, वहीं सैकड़ों विद्यार्थी घरद्वार पर बेहतर शिक्षा की सुविधा से वंचित हैं। स्कूल में पांच माह से टीजीटी मेडिकल, छह माह से टीजीटी नॉन मेडिकल, वर्ष २०२३ से कला अध्यापक, 2015 से पीईटी, 2020 से अर्थशास्त्र और गणित शिक्षक और राजनीतिक शास्त्र के पद रिक्त पड़े हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में बिना शिक्षक शिक्षा का स्तर कैसा होगा। वर्तमान में स्कूल में छठी से लेकर बारहवीं कक्षा तक 214 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि बीते वर्ष यहां से कई छात्र-छात्राओं ने दूसरे स्कूलों का रुख कर लिया है। खाली पदों की मार से स्कूल में तैनात शिक्षकों पर भी कार्य का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। अभिभावकों को चिंता सता रही है कि बिना शिक्षक उनके बच्चों का भविष्य कैसे संवरेगा। सरकार और शिक्षा विभाग की नाकामी का दंश सैकड़ों विद्यार्थियों पर भारी पड़ रहा है। जाओं स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष नरोत्तम ठाकुर, दलजीत ठाकुर, बीना, आशा देवी, सेस राम, राजेश्वर और संदेव सिंह सहित अन्य अभिभावकों ने कहा कि शिक्षकों की कमी से छात्रों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। खाली पदों को भरने के लिए समय-समय पर सरकार और शिक्षा विभाग से मांग उठाई जा रही है लेकिन अभी तक शिक्षकों की तैनाती की कोई सूचना नहीं है। स्कूल के प्रधानाचार्य राजू कश्यप ने कहा कि शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। रिक्त पदों को लेकर विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्कूल में जल्द शिक्षकों की तैनाती होगी।