मोइन क्रशर प्लांट को ढकने और रात में बंद रखने की उठी मांग, रोजगार का मुद्दा भी उठाया
प्रशासन, परियोजना और किसान सभा की बैठक में प्रभावितों ने उठाए मुद्दे
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सतलुज नदी पर बन रही एसजेवीएन की लुहरी परियोजना के प्रभावितों ने 12 मार्च से पूर्व दरारों और प्रदूषण का मुआवजा जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही इस अवधि से पूर्व बचे इलाकों का सर्वे करने का भी प्रभावितों ने मुद्दा उठाया है। किसान सभा ने चेताया कि अगर 12 मार्च तक प्रभावितों की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो 13 मार्च को फिर से परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। हिमाचल किसान सभा, उपमंडल प्रशासन रामपुर, निरमंड और कुमारसैन, सतलुज जल विद्युत निगम के अधिकारियों की नीरथ में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में किसान सभा ने परियोजना प्रभावितों क्षेत्रों में लोगों के मकानों में आईं दरारें, प्रदूषण, मोइन में लगे क्रशर प्लांट और रोजगार के मुद्दे उठाए। किसान सभा ने कहा कि जिन क्षेत्रों में प्रदूषण, दरारों का सर्वे हो चुका है, उसका मुआवजा 12 मार्च से पहले दिया जाए और जहां पर सर्वे नहीं हुआ है, वो कार्य भी 12 मार्च तक पूरा किया जाए। साथ ही मोइन में लगे पटेल कंपनी के क्रशर प्लांट से उठ रही धूल से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इससे पशु बीमार हो रहे हैं और घास भी खराब हो रहा है। सभा ने क्रशर प्लांट को पूरी तरह से ढकने और रात के समय क्रशर न चलाने की मांग की। इसके अलावा परियोजना में स्थानीय लोगों को रोजगार देने और जिन परिवारों की जमीन परियोजना में गई है, उन परिवारों को जब तक रोजगार नहीं मिलता, तब तक उनके एक सदस्य को ट्रेड के अनुसार घर बैठे वेतन देने की मांग भी की गई है। बैठक में एसडीएम रामपुर, कुमारसैन और निरमंड ने समस्याओं का समाधान 12 मार्च तक पूरा करने का आश्वासन दिया। किसान सभा जिला शिमला सचिव देवकी नंद ने चेताया कि अगर प्रभावितों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 13 मार्च को फिर से निरथ में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।