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Rampur Bushahar News: जिले में 53 डॉक्टर आज से सामूहिक अवकाश पर, मोमबत्तियां जलाकर जताया रोष

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मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे चिकित्सक, मरीजों को झेलनी पड़ेंगी परेशानियां
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संवाद न्यूज एजेंसी

रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले के अस्पतालों में कार्यरत 53 चिकित्सक एनपीए समेत अन्य मांगें पूरी न होने पर वीरवार से सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। इससे जिले के अस्पतालों में मरीजों को भारी परेशानी से जूझना पड़ेगा। चिकित्सकों ने इस संबंध में विभाग को भी अवगत करवा दिया गया है। बुधवार को चिकित्सकों ने क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में कलम छोड़ो हड़ताल के दौरान मोमबत्तियां जलाकर प्रदेश सरकार के प्रति रोष जताया। क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ, पूह, सांगला और भावानगर स्वास्थ्य केंद्रों में 4 से 6 डॉक्टर काम कर रहे हैं। वीरवार से अस्पतालों में तीन दिन की छुट्टी है। इसमें सात मार्च को सामूहिक अवकाश, आठ मार्च को महाशिवरात्रि, नौ को दूसरे शनिवार को काम करेंगे और 10 मार्च को रविवार आ रहा है। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन की 16 दिनों से कलम छोड़ो हड़ताल चल रही है। इससे मरीजों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। बुधवार को ढाई घंटे की कलम छोड़ाे हड़ताल के दौरान चिकित्सकों ने माेमबत्तियां जलाकर सरकार के प्रति रोष प्रकट किया। मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. सोनम गियालच्छेन नेगी ने बताया कि किन्नौर के सभी अस्पतालों में वीरवार को 53 डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के निर्देशानुसार जिले के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक मांगों के समर्थन में ढ़ाई घंटे की कलम छोड़ो हड़ताल पर हैं। नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री के चिकित्सकों की मांगों को पूरा करने की हामी भरने के बाद भी अफसरशाही इसे धरातल पर लागू नहीं कर रही है। इसके बजाय अफसरशाही चिकित्सकों को डरा धमका रही है, जबकि लोकतांत्रिक प्रणाली में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का हक है। उन्होंने कहा कि अफसरशाही के इस रवैये को देखते हुए ही चिकित्सकों को मजबूर ढाई घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक करने को बाध्य होना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि डॉक्टरों की प्रोग्रेशन, डायनेमिक करियर प्रोग्रेशन स्कीम, डीपीसी को रेगुलर करने, निदेशक प्रोजेक्ट का कार्यभार स्वास्थ्य निदेशक को सौंपने और पदोन्नति योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर देने की मांग को लेकर चिकित्सक पिछले एक महीने 16 दिनों से काले बिल्ले लगाकर ड्यूटी कर रहे थे। आंदोलन के दूसरे चरण में 16 दिनों से चिकित्सक रोजाना ढाई घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक कर रहे हैं।
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