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दायित्वों का निवर्हन करते हुए आईटीबीपी ने बनाई विशेष पहचान : कृष्ण रजक

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१९वीं वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल सराहन में स्थापना दिवस के दौरान सलामी देते हुए।
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भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस बल की 43वीं वाहिनी के परिसर में मनाया गया स्थापना दिवस
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संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। महानिदेशालय भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के आदेशों और चंदन सिंह भंडारी, सेनानी 43वीं वाहिनी के निर्देशों के तहत मंगलवार को 43वीं वाहिनी आईटीबीपी के परिसर में स्थापना दिवस मनाया गया। ज्यूरी में कृष्ण रजक उप सेनानी, जीडी कमान अधिकारी के साथ समस्त अधिकारियों और जवानों ने मिलकर बल स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल की स्थापना 24 अक्तूबर, 1962 को हुई थी। बल का गठन केवल चार वाहिनियों की स्थापना के साथ हुआ, जो अब 60 सेवा वाहिनियों, चार विशेष वाहिनियों, 17 प्रशिक्षण केंद्र और सात रसद प्रतिष्ठान के साथ एक सुदृढ़ और सशक्त बल का रूप ले चुका है। बल कराकोरम दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के दिफूला तक 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहा है। बल के गठन के बाद बदलती परिस्थितियों में आईटीबीपी की भूमिका एवं दायित्वों में भी व्यापक परिवर्तन आए हैं। आज हमारे बल ने भारत-चीन सीमा की निगरानी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास की सुरक्षा, जम्मू कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा, देश के अनेकों राज्यों में चुनाव डयूटी एवं वर्तमान में वैश्विक महामारी कोरोना के संकट काल में अपने चुनौतिपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए विशेष पहचान बनाई है।
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