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Rampur Bushahar News: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उपकेंद्र मुनिश

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स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की नब्ज टटोलने वाला नहीं कोई, वर्ष 2014 से आयुष विभाग ने नहीं की चिकित्सक की तैनाती
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लोगों ने चेताया, एक माह में नहीं हुई चिकित्सक की तैनाती तो करेंगे प्रदर्शन

संवाद न्यूज एजेंसी

डंसा (रामपुर बुशहर)। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के दावे कर रही है, वहीं दुर्गम एवं पिछड़े क्षेत्रों के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। रामपुर विकास खंड की पिछड़ी पंचायत मुनिश के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में बीते नौ वर्ष से चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। वर्तमान में यह स्वास्थ्य उपकेंद्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले चल रहा है। ऐसे में मरीजों को छोटी सी बीमारी होने पर उसके इलाज के लिए कई किलोमीटर जाना पड़ता हैं। क्षेत्र के लोगों में सरकार और विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर रोष है। ग्रामीणों ने चेताया कि अगर जल्द रिक्त पदों को नहीं भरा गया, तो ग्रामीण प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ेगा। गौर हो कि कांग्रेस सरकार के पिछले कार्यकाल में ग्रामीणों को घरद्वार स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए आयुष विभाग ने स्वास्थ्य उपकेंद्र मुनिश खोला लेकिन हैरत की बात है कि नौ साल की अवधि बीतने के उपरांत भी आज तक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पाई है। इसके कारण ग्रामीणों को स्वास्थ्य केंद्र का लाभ नहीं मिल पा रहा और उन्हें उपचार के लिए तकलेच या फिर रामपुर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सरकार की अनदेखी से पंचायत क्षेत्र के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। मुनिश पंचायत के प्रधान भजन दास ने बताया कि सरकार और विभागीय अधिकारियों को बाकायदा पंचायत के माध्यम से इस सिलसिले में कई बार लिखित तौर पर प्रस्ताव प्रेषित किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। स्वास्थ्य केंद्र में न तो फार्मासिस्ट तैनात है और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी। आयुष विभाग का भवन जर्जर हालत में पड़ा है। इसकी मरम्मत के बारे में भी कोई पहल नहीं हो रही। वार्ड सदस्य रमेश चंद, सुरेंद्र भंडारी, जय सिंह, मान कुमारी, राधा मक्कर, महिला मंडल प्रधान सुंदरी देवी, लीलावती, राजेंद्र, दिनेश और विक्रम सहित अन्य ग्रामीणों ने सरकार और विभाग को चेताया कि अगर स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती एक महीने के अंदर नहीं की गई तो जनप्रतिनिधि ग्रामीणों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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