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Rampur Bushahar News: जनजातीय जिले का दर्द, बिना सिटी स्कैन कैसे पता लगे मर्ज

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चार दशक में भी रिकांगपिओ अस्पताल में स्थापित नहीं हुई सिटी स्कैन मशीन्र
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मरीजों को रामपुर और शिमला की लगानी पड़ रही दौड़, छह माह में 68 मरीजों को किया गया रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के एकमात्र क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में करीब 40 सालों से सिटी स्कैन मशीन स्थापित नहीं हो पाई है। जिले के मरीजों का दर्द यह है कि आपात परिस्थितियों में सिटी स्कैन की सुविधा नहीं होने से बीमारी का पता कैसे चलेगा। ऐसे में मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए सौ किलोमीटर दूर रामपुर और दो सौ किलोमीटर से अधिक दूर शिमला के आईजीएमसी जाना पड़ रहा है। बीते दिन भी किन्नौर जिले के रामनी में 39 वर्षीय मालदास को भेड़-बकरियां चराते समय पहाड़ से पत्थर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। उनके सिर पर चोटें आई हैं। रात को उन्हें रिकांगपिओ अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन चिकित्सकों की बेबसी यह है कि सिर की चोट कितनी गंभीर है, इसकी जांच-पड़ताल के लिए सिटी स्कैन मशीन ही नहीं है। इस कारण मरीज को रामपुर सरकारी अस्पताल रेफर किया गया। लोगों के मुुताबिक 40 साल पहले कल्पा से रिकांगपिओ क्षेत्रीय अस्पताल शिफ्ट किया गया था लेकिन आज भी जिले की जनता को सिटी स्कैन की सुविधा नहीं मिल पाई है। जिले की जनसंख्या की बात करें तो कुल 84,121 जनसंख्या है। इसमें 46,249 पुरुष और 37,872 महिलाएं की जनसंख्या शामिल हैं। सिटी स्कैन मशीन न होने से लोगों का स्वास्थ्य राम भरोसे है। लोगों को दुख इस बात का है कि न कांग्रेस और न ही भाजपा सरकार ने किन्नौर की जनता के लिए बेहतर उपचार की सुविधा मुहैया करवाने के लिए उचित कदम उठाए हैं। क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ को करीब 40 साल हो चुके हैं लेकिन आज तक सिटी स्कैन मशीन स्थापित नहीं हो पाई है। प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की सरकार किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है। इस वजह से हर साल किन्नौर से हजारों की संख्या में मरीज सिटी स्कैन करवाने के लिए रामपुर, शिमला, सोलन और चंडीगढ़ जाने को मजबूर हैं। वहीं, चिकित्सकों के मुताबिक सिटी स्कैन मशीन न होने से बहुत मरीजों को किन्नौर से बाहर के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। मरीजों के सिर में चोट, स्पाइन दर्द और पेट की विभिन्न प्रकार की बीमारी की जांच, गुर्दे में पथरी, कैंसर का स्तर का पता लगाने, हार्ट की समस्याएं, घुटने की समस्याएं, छाती का इलाज और रीड़ की हड्डी के इलाज के साथ ट्यूमर की पहचान करना सिटी स्कैन मशीन से ही होता है। ऐसे में मशीन नहीं होने से चिकित्सकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी किन्नौर डॉ. सोनम नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि किन्नौर से पिदले 6 महीने में 68 मरीजों को सिटी स्कैन मशीन न होने के कारण इलाज के लिए रेफर किया गया है। बीते माह 23 तारीख को रोगी कल्याण समिति की वार्षिक बैठक कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई थी। इस बैठक में उन्होंने आश्वासन दिया कि वर्ष 2024 में अस्पताल में सिटी स्कैन मशीन स्थापित की जाएगी।
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