मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के चलते चार दिन तक मेले में नहीं कर सकेंगे शिरकत, पहली बार लाव लश्कर के साथ पहुंचेंगे देवता खुड्डीजल
शिमला और कुल्लू जिले के देवी-देवता बढ़ाएंगे फाग मेले की शोभा
सुभाष सेन
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से विख्यात है। यहां देव परंपराओं की सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी कायम है। लोगों में देव आस्था के प्रति आज भी उतनी ही श्रद्धा है, जितनी दशकों पूर्व थी। ऐसा ही देव आस्था का प्रतीक है रामपुर का फाग मेला। होली पर्व के अगले दिन शुरू होने वाले मेले में जिला शिमला और कुल्लू के देवी-देवता शिरकत करते हैं। इस दौरान रामपुर के राजदरबार परिसर में चार दिनों तक देवधुनों पर हजारों लोग मग्न होकर नाटी लगाकर सदियों पुरानी परंपरा के गवाह बनते हैं। फाग मेले के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब क्षेत्र के अधिष्ठाता देवता साहिब जाख रचोली फाग मेले की रस्में निभाकर वापस मंदिर लौट आएंगे। देवता जाख के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के चलते मेले में चार दिन शामिल नहीं हो सकेंगे। 25 मार्च होली की शाम को देवता साहिब जाख रचोली, देवता साहिब बसाहरु और देवता साहिब गसोह राजदरबार परिसर पहुंचेंगे और दरबार की ओर से आयोजित होने वाले होली पर्व की परंपराओं को निभाएंगे। अगली सुबह देवता जाख पूजा-पाठ कर वापस मंदिर रचोली लौट जाएंगे। मेले में आउटर सराज क्षेत्र के आराध्य देवता खुड्डीजल महाराज पहली बार फाग मेले में शामिल होंगे। उनके साथ हजारों की संख्या में देवलू और श्रद्धालु पदम महल परिसर में कुल्लवी देव संस्कृति की झलक दिखाएंगे। नगर परिषद रामपुर ने जिला शिमला और कुल्लू के 29 देवी-देवताओं को फाग मेले का निमंत्रण भेजा है। इनमें से 26 देवी-देवताओं ने मेले में आने को लेकर हामी भरी है। इस दौरान चार दिन तक समूचा रामपुर शहर देवधुनों में डूबा रहेगा, जबकि पदम महल परिसर में चार दिन तक नाटियों का दौर चलेगा। इसमें शिमला और कुल्लू जिले सहित अन्य क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचेंगे। देवता साहिब जाख रचोली मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने बताया कि देवता साहिब के आदेशानुसार इस बार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के चलते देवता साहिब मेले की रस्में निभाकर वापस मंदिर लौट जाएंगे।