संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। उपमंडल चौपाल और कुपवी के किसानों और बागवानों को प्राकृतिक खेती की तरफ आकर्षित करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता कृषि सलाहकार समिति कुपवी के अध्यक्ष तुलसी जमालटा ने की। शिविर में डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्योगिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र चौहान ने किसानों और बागवानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए किसानों, बागवानों को प्रशिक्षित किया। विशेषज्ञ ने शिविर में किसानों और बागवानों को अग्निअस्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं जीवामृत प्राकृतिक छिड़काव तैयार करने और इनके प्रयोग संबंधित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में खाद्य पदार्थों में जाने अनजाने कई किस्म के घातक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। रासायनिक पदार्थ हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाकर कई घातक बीमारियों के चपेट में ला रहे हैं। रसायनों के घातक प्रभाव को देखते हुए प्राकृतिक खेती की अति आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में प्राकृतिक खेती की अपार संभावनाएं हैं। किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनानी चाहिए। जैविक खेती अपनाने से पहाड़ों से विलुप्त परंपरागत अनाज का संरक्षण भी होगा और लोगों को रसायन मुक्त पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी मिलेंगे। शिविर के दौरान किसानों और बागवानों को ड्रोन के द्वारा प्राकृतिक छिड़काव की स्प्रे का डेमो भी दिया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन से स्प्रे काफी लाभदायक सिद्ध होगा। किसान सलाहकार समिति के अध्यक्ष तुलसी जमालटा ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार इस खेती के प्रोत्साहन के लिए योजनाएं भी लेकर आई है। अतः किसानों को योजनाओं का लाभ उठाते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए।