ओलावृष्टि से फसल को बचाने के लिए कारगर साबित होते हैं एंटी हेलनेट
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। मार्च में ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए बागवानों ने सेब के बगीचों में जालियां (एंटी हेलनेट) लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे मौसम के विपरीत रहने पर फसल को नुकसान न हो। विकट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर वर्ष ओलावृष्टि के कारण करोड़ों की फसल को नुकसान पहुंचता है। इससे कई बार बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ओलावृष्टि से सेब दागी हो जाता है, ऐसे में मंडियों में भी इसके उचित दाम नहीं मिलते हैं। इसको देखते हुए बागवानों में एंटी हेलनेट लगाने की ओर रूझान बढ़ा है। इसका फायदा भी पिछले कुछ सालों में देखने को मिल रहा है। कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू और चिड़गांव सहित आसपास के निचले क्षेत्रों के बगीचों में सेब के पौधों पर इन दिनों जालियों को लगाने का काम बागवान कर रहे हैं। प्रदेश की आर्थिकी में सेब की फसल का बड़ा योगदान रहता है। इस महीने के अंत तक सेब के बगीचों में फूल आने शुरू हो जाएंगे। मौसम अनुकूल रहा तो अच्छी फसल की उम्मीद रहती है। ओलावृष्टि से सेब और अन्य फलों को दागी होने से बचाने के लिए एंटी हेलनेट होना जरूरी है। बहरहाल क्षेत्र के अधिकांश बागवान एंटी हेलनेट का प्रयोग बगीचों में करने लगे हैं। बड़े बागवानों के साथ मध्यम वर्गीय बागवानों ने भी सेब के बगीचों में एंटी हेलनेट लगाना शुरू कर दिया है। बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी डॉ नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में नेट डालने का कार्य फूल आने से पहले पूरा किया जा सकता है। इसके बाद फल सेटिंग के बाद ही नेट लगाने का समय उचित रहेगा। उन्होंने बताया कि नेट लगाते समय फूलों को नुकसान होता है। उस समय बीमा भी नाजुक होता है। इसलिए सही समय पर ही इस कार्य को बागवान पूरा करें।