रामपुर कोर्ट ने सुनाया फैसला, बैंक से लिए पांच लाख रुपये के ऋण से जुड़ा है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के मामले में रामपुर की अदालत ने पूरन लाल को दोषी करार दिया है और छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने दोषी को शिकायतकर्ता हिमाचल प्रदेश सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक को 1.71 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामले के अनुसार, आरोपी ने बैंक से भूमि विकास के लिए पांच लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण की किस्तों का नियमित भुगतान नहीं करने पर बैंक की देनदारी बकाया हो गई। इसके बाद आरोपी ने देनदारी चुकाने के लिए बैंक को 85,500 रुपये का चेक जारी किया। बैंक में प्रस्तुत करने पर 1 जुलाई 2018 को यह चेक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। बैंक ने 23 अक्तूबर 2018 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद बैंक ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा-138 के तहत अदालत में शिकायत दाखिल की। सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से अधिकृत अधिकारी ने गवाही दी और चेक, बैंक का अनादरण मेमो, कानूनी नोटिस और डाक संबंधी दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए। आरोपी ने बचाव में चेक को सुरक्षा के तौर पर देने की दलील दी है, लेकिन अदालत में इसे साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने माना कि आरोपी चेक बाउंस से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अपनी देनदारी से जुड़े वैधानिक अनुमान का खंडन करने में विफल रहा। सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी का पहला अपराध होने और अच्छे आचरण का हवाला देते हुए नरमी बरतने की मांग की। हालांकि, अदालत ने उसे छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई और बैंक के पक्ष में 1.71 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए।