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Rampur Bushahar News: ठियोग में एक सीट कांग्रेस, एक भाजपा और एक निर्दलीय के नाम

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जिला परिषद चुनाव में ठियोग उपमंडल की राजनीति लाई दिलचस्प मोड़
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घोड़ना जिला परिषद वार्ड से सुरेंद्र मोगटा और टियाली से नेहा जागटा जीती

संवाद न्यूज एजेंसी

ठियोग (रामपुर बुशहर)।
जिला परिषद चुनाव में ठियोग उपमंडल की राजनीति दिलचस्प मोड़ लाई है। तीनों जिला परिषद वार्डों में मतदाताओं ने अलग-अलग राजनीतिक विकल्पों पर भरोसा जताते हुए एक सीट कांग्रेस समर्थित, एक भाजपा और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार की झोली में डाल दी। परिणामों ने साफ कर दिया है कि क्षेत्र में किसी एक दल का पूर्ण वर्चस्व नहीं है। सबसे अधिक चर्चा घोड़ना जिला परिषद वार्ड की रही, जहां निर्दलीय उम्मीदवार सुरेंद्र मोगटा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 8406 मत प्राप्त किए। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार विकेश को 2212 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। विकेश को 6194 मत मिले। वहीं, अन्य उम्मीदवारों में शशिपाल को 809 और आत्माराम को 595 मत प्राप्त हुए। सुरेंद्र मोगटा की जीत को क्षेत्र में स्थानीय नेतृत्व और जनसंपर्क की जीत के रूप में देखा जा रहा है। मोगटा भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार माने जाते थे, लेकिन पार्टी ने विकेश पर दांव खेला, जिसे जनता ने हराकर गलत साबित कर दिया। हालांकि, विकेश के प्रचार का जिम्मा चौपाल के भाजपा विधायक बलबीर वर्मा संभाल रहे थे। उधर, टियाली जिला परिषद वार्ड में भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत रखते हुए जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार नेहा जागटा ने 8481 मत हासिल कर सीपीआई(एम) की उम्मीदवार आकांक्षा को पराजित किया। इस जीत ने भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। इस सीट पर कांग्रेस विचारधारा की प्रियंवदा सिंह, बबीता ठाकुर और सुमन राठौर खड़ी थीं, जिन्हें क्रमश 1062, 2181 और 2385 वोट मिले। यदि कांग्रेस हाई कमान हस्तक्षेप करता, तो कांग्रेस विचारधारा को मिलने वाले वोट की संख्या 7628 हो सकती थी, जिससे हार को जीत में तब्दील किया जा सकता था। इसी तरह ठियोग से विधायक का चुनाव लड़ चुके अजय श्याम के गृह क्षेत्र में भाजपा अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई है। यहां भाजपा बागी उम्मीदवार मदन लाल वर्मा की बहू संजना वर्मा, जोकि दूसरे स्थान पर रही, के सफल होने के आसार बन सकते थे। वहीं, तीसरे जिला परिषद वार्ड में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की जीत ने यह संकेत दिया है कि ठियोग की राजनीति अब भी बहुध्रुवीय बनी हुई है। चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि ठियोग में मतदाताओं ने दलगत राजनीति के साथ-साथ उम्मीदवारों की व्यक्तिगत स्वीकार्यता को भी महत्व दिया है। एक सीट भाजपा, एक कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में जाने से क्षेत्र की राजनीति में संतुलन का नया समीकरण उभरकर सामने आया है।
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