याचिकाकर्ता को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना के अनुसार दिया गया मुआवजा
भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। लूहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा बढ़ाने की मांग के संबंध में भूमि मालिक की ओर से दर्ज याचिका को अदालत ने खारिज किया है। अदालत ने प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण कार्य को पूरा करने के लिए जारी प्रारंभिक अधिसूचना के अनुसार मुआवजा देने को सही बताया है। निरमंड के एक व्यक्ति ने मुआवजा बढ़ाने के लिए रामपुर स्थित भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण किन्नौर के समक्ष याचिका दायर की थी। तर्क दिया था कि 16 अगस्त 2024 को कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए जारी की गई अधिसूचना के अनुसार को याचिकाकर्ता एकमुश्त वार्षिकी के रूप में 7,75,000 रुपये का हकदार है। अदालत ने निर्णय में बताया है कि लूहरी प्रोजेक्ट के मामले में भूमि अधिग्रहण कार्य को पूरा करने के लिए 30 सितंबर 2021 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी, जबकि कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए की गई अधिसूचना याचिकाकर्ता को मुआवजे के 5,50,000 रुपये की प्राप्ति के बाद जारी की गई थी। इसके अलावा लूहरी प्रोजेक्ट के संबंध में तैयार की गई पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना पर भी याचिकाकर्ता ने कोई आपत्ति नहीं उठाई। याचिकाकर्ता को एकमुश्त भुगतान के रूप में पांच लाख रुपये और व्यवधान भत्ते के रूप में 50 हजार रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। वह एकमुश्त वार्षिकी में किसी भी वृद्धि के हकदार नहीं हैं। अत: याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका विचारणीय नहीं है।