किन्नौर में रौरा-II ऊर्जा कंपनी के स्टोन क्रशर को सील करने के आदेश
प्रदूषण नियंत्रण नियमों के लगातार उल्लंघन पर बोर्ड ने की कार्रवाई
कंपनी पर क्रशर को चलाने की अनिवार्य मंजूरी न लेने का आरोप
प्रकाश ठाकुर
रामपुर बुशहर। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) ने किन्नौर जिले के चोलिंग गांव में रौरा-II (20 मेगावाट) गैर पारंपरिक ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड के स्टोन क्रशर को सील करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई कंपनी की ओर से प्रदूषण नियंत्रण नियमों के लगातार उल्लंघन के कारण की गई है। कंपनी पर क्रशर को चलाने की अनिवार्य मंजूरी न लेने और पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपकरण न लगाने का आरोप है। यह आदेश जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत जारी किया गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय रामपुर ने उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी थी। रिपोर्ट के अनुसार, रौरा-II ऊर्जा कंपनी का निरीक्षण चार जून को किया गया था। निरीक्षण में पाया गया कि कंपनी ने राज्य बोर्ड की अनिवार्य सहमति के बिना स्टोन क्रशर स्थापित किया था और क्रशर का संचालन कर रही थी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और डीईएसटी दिशानिर्देशों के अनुसार, क्रशर स्थल पर पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपकरण भी नहीं लगाए गए थे। क्षेत्रीय कार्यालय रामपुर ने 18 जून को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें दो सप्ताह के भीतर पर्यावरणीय मानकों का पालन करने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। लगातार गैर अनुपालन और रिपोर्ट जमा न करने पर 4 जुलाई को एक और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस में स्टोन क्रशर का संचालन तुरंत बंद करने को कहा गया था। कंपनी को बोर्ड की सहमति के लिए आवेदन करने और पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने का भी निर्देश दिया गया। कंपनी को सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था, लेकिन नोटिस जारी होने और निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी कंपनी ने अनुपालन नहीं किया। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर रामपुर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने स्टोन क्रशर को सील करने की सिफारिश की थी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब कंपनी को चोलिंग गांव में स्थापित स्टोन क्रशर इकाई का संचालन तुरंत बंद करने का आदेश दिया है। इसमें डीजल जनरेटर सेट या किसी अन्य ऊर्जा स्रोत से भी उत्पादन न करने को कहा गया है। क्षेत्रीय अधिकारी, रामपुर को स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के सहयोग से इकाई को सील करने का आदेश दिया गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संयंत्र संचालित न हो। कंपनी यदि इन आदेशों का पालन नहीं करती है, तो उसे संज्ञेय अपराध माना जाएगा। इसके लिए 15 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि उल्लंघन जारी रहता है, तो जल अधिनियम, 1974 की धाराओं 41-ए, 42, 43 और 45-ए के तहत प्रतिदिन दस हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगेगा। संवाद