एसोसिएशन ऑफ स्कूल प्रिंसिपल्स एंड इंस्पेक्शन ऑफिसर्स की हुई ऑनलाइन बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई पैटर्न लागू होने के बाद प्रधानाचार्यों और अध्यापकों के प्रस्तावित स्थानांतरण पर सवाल उठे हैं। एसोसिएशन ऑफ स्कूल प्रिंसिपल्स एंड इंस्पेक्शन ऑफिसर्स ने एक ऑनलाइन बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की। एसोसिएशन ने राज्य सरकार और कैबिनेट उप समिति से राहत की मांग की है। एसोसिएशन ने सेवानिवृत्ति के करीब दो वर्ष वाले प्रधानाचार्यों को दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानांतरण से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस आयु में पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियां निभाना कठिन होता है। नव पदोन्नत प्रधानाचार्यों के लिए एक वर्ष की परीक्षा और प्रशिक्षण अवधि का सुझाव दिया गया। इसका उद्देश्य उन्हें प्रशासनिक अनुभव दिलाना और सीबीएसई विद्यालयों में बेहतर कार्य करने में मदद करना है। एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया कि सीबीएसई में परिवर्तित विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों को वहीं बनाए रखा जाए। इन प्रधानाचार्यों ने निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण की है। प्रभावित प्रधानाचार्यों को स्टेशन का विकल्प और समायोजन के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। प्रदेश के लगभग 1100 प्रधानाचार्य आयु सीमा के कारण स्क्रीनिंग टेस्ट में शामिल नहीं हो सके। इससे बड़ी संख्या में अनुभवी प्रधानाचार्य प्रभावित हुए हैं। एसोसिएशन ने मानवीय आधार पर राहत देने की अपील की है। उन्होंने स्क्रीनिंग टेस्ट उत्तीर्ण प्रधानाचार्यों का योग्यता-आधारित पूल बनाने का सुझाव दिया। साथ ही, रिक्तियों के अनुसार चरणबद्ध तैनाती की व्यवस्था लागू करने की मांग की।