रामपुर बुशहर। शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास की नींव होती है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इस बार के बजट में शिक्षा के लिए कोई बड़ा ठोस निवेश या व्यापक योजना दिखाई नहीं दी। यह केवल एक चूक नहीं, बल्कि हमारे भविष्य के साथ एक बड़ा अन्याय है। रामपुर कॉलेज की एसएफआई इकाई के सचिव राहुल विद्यार्थी ने जारी बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की हालत किसी से छिपी नहीं है। कहीं कक्षाओं की कमी है, कहीं लैब और पुस्तकालय अधूरे हैं। सबसे गंभीर समस्या शिक्षकों की भारी कमी है। जब शिक्षक ही नहीं होंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी। साथ ही फीस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा लेना प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। क्या शिक्षा अब सिर्फ अमीरों का अधिकार बनकर रह जाएगी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कि जब युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है, तो बजट में शिक्षा को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई। कहा कि यह सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं है, यह हमारे अधिकारों का सवाल है। यह छात्रों के भविष्य का सवाल है। अगर आज हम चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी। आज जरूरत है कि हम आवाज उठाएं, अपने हक के लिए खड़े हों और सरकार से जवाब मांगें। शिक्षा हमारा अधिकार है और इसे किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।