रोहड़ू। हिमाचल आदर्श संस्कृत महाविद्यालय जांगला में भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा पद्धति विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हो गया। समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित होकर प्रो. उमा चंद्रशेखर वैद्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः जनमानस में स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि प्रो. उमा अंतानी और मुख्य वक्ता डॉ. मुनीश कुमार मिश्र ने भारतीय शिक्षा पद्धति, गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच अंतर पर विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। वैदिक मंगलाचरण डॉ. धनेश कुमार पाण्डेय ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण डॉ. लोकेश्वर शर्मा ने दिया, जबकि मंच संचालन डॉ. हरिदत्त ग्वाडी ने किया। इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय सीमा के वक्ताओं ने भी विचार साझा किए। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय सरैन के प्राचार्य डॉ. ऋतेश शर्मा ने स्वरचित श्लोकों के माध्यम से छात्रों को प्रेरित किया। प्रो. उमा अंतानी ने भारतीय नाट्य एवं संगीत शास्त्र के माध्यम से ‘ॐ’ के महत्व और गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित किया। डॉ. मुनीश कुमार मिश्र ने भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्वों और उसकी आधुनिक शिक्षा में उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज की प्राचार्या प्रो. स्नेहलता शर्मा ने सभी का धन्यवाद किया।