बंदरों के आतंक के कारण किसान छोड़ रहे खेतीबाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
दलाश (कुल्लू)। दलाश क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इससे किसान-बागवान परेशान हैं। बंदर हर फसल को नष्ट कर रहे हैं। बंदर सेब, प्लम, नाशपाती समेत अन्य फलों के बगीचों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बंदरों के आतंक से किसानों-बागवानों की हजारों बीघा उपजाऊ भूमि फसलों के बिना बंजर हो रही है। कई किसानों ने बंदरों के आतंक से हजारों बीघा भूमि पर खेती करना लगभग छोड़ दिया है। दलाश, रिवाड़ी, रौं, चपोहल और गोहाण सहित अन्य क्षेत्र में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। हर वर्ष किसान और बागवान अपने खेतों में हजारों रुपये खर्च कर फसलों की बिजाई करते हैं, लेकिन फसल उगने पर बंदर इन्हें नष्ट कर देते हैं। इस कारण हर साल किसानों को हजारों रुपयों का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। कई बागवानों का घर सेब बगीचों से चलता है, लेकिन बंदर पूरी फसल बर्बाद कर रहे है। सेब क्षेत्र के बागवानों की प्रमुख नकदी फसल है। बंदर हर साल लाखों रुपये का सेब बर्बाद कर रहे हैं। सेब के पेड़ों को भी तोड़ कर नष्ट कर रहे हैं। बंदरों ने गांव में भी घरों के अंदर दस्तक देना शुरू कर दिया है। बंदरों के कारण बच्चों को घर से निकलने के लिए बड़ो का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण संजीव शर्मा, महेंद्र, सुभाष, ओंकार चंद , नागेंद्र, हरीश सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बढ़ रहे बंदर के आतंक से अब उन्हें अपने बच्चों को खुद स्कूल तक छोड़ना पड़ रहा है। कई बागवानों का घर खेती से चलता है, लेकिन बंदरों के आतंक से लोगों को खेती करना छोड़ना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग उठाई है। इससे किसानों-बागवानों को पेश आ रही दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बंदरों को अब घातक घोषित कर दिया है। बंदरों को पकड़ने के लिए पंचायत स्तर पर प्रयास किए जा सकते हैं।-सीएल रॉय, डीएफओ लूहरी