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पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मिड-डे मील योजना का किया जा रहा निजीकरण : यूनियन

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मिड डे मील वर्कर्स यूनियन (संबंधित सीटू) ब्लॉक इकाई सराहन के पदा​धिकारी और सदस्य ज्यूरी में बैठ
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पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मिड-डे मील योजना का किया जा रहा निजीकरण : यूनियन
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संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन (संबंधित सीटू) ब्लॉक इकाई सराहन की बैठक यूनियन अध्यक्ष मीना की अध्यक्षता में ज्यूरी में हुई। बैठक में लंबित मांगें पूरी न होने के कारण रोष जताया और आगामी रणनीति तैयार की गई। बैठक में फैसला लिया है कि यदि जल्द मांगों पर गौर नहीं किया तो 18 जुलाई को प्रदर्शन किया जाएगा। सीटू जिला कमेटी सदस्य दिनेश मेहता, नारायण खन्ना, यूनियन अध्यक्ष मीना और महासचिव संगीता ने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों को फायदा पंहुचाने के लिए मिड-डे मील योजना का निजीकरण करने की कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार, मिड-डे मील मजदूरों को मजदूर का दर्जा देने, पेंशन, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य आदि सुविधा को लागू नहीं किया जा रहा है। मोदी सरकार ने मिड-डे मील वर्करों के वेतन में 2014 के बाद से अभी तक एक रुपये की वृद्धि नहीं की है, बल्कि अप्रैल 2024 से अभी तक केंद्र से मिलने वाली 1000 रुपये मानदेय भी केंद्र सरकार की ओर से जारी नहीं किया है, जो मोदी सरकार का गरीब विरोधी रवैया दर्शा रहा है। मोदी सरकार ने मिड-डे मील योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण योजना करके इसे खत्म करने का खाका तैयार किया है। सरकार मिड-डे मिल योजना में केंद्रीय रसोईघर और डीबीटी शुरू कर रही है। स्कूलों में मिड-डे मील के खाते बंद कर दिए गए हैं। मोदी सरकार की ओर से नई शिक्षा नीति को देश में लागू की जा रही है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने बजट में मिड-डे मील वर्करों को चार हजार रुपये मानदेय को बढ़ाकर 4500 रुपये एक अप्रैल 2024 से देने की घोषणा की है। मानदेय में मात्र 500 रुपये की बढ़ोतरी मिड-डे मील वर्करों के साथ मजाक है। वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा कई स्कूल बंद किए हैं। मिड डे वर्कर्स का रोजगार छीना जा रहा है। यूनियन ने सरकार से हरियाणा के तर्ज पर सात हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है। मजदूर का दर्जा देने, हिमाचल हाईकोर्ट के 31 अक्तूबर, 2019 के निर्णय अनुसार 10 महीने के बजाये 12 महीने का वेतन देने सहित अन्य मांगों और पंजाब सरकार की तर्ज अन्य मांगें पूरी करने की गुहार लगाई है। वहीं, मांगें पूरी न होने पर चेताया है कि 18 जुलाई को प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर बबली, गंगा, गुंदला, प्रोमिला, मैना, विजय लक्ष्मी, कमला, सुभद्रा, शांता, ज्ञानी देवी, सुमन, आशा और पुष्पा सहित अन्य मौजूद रहे।
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