कोटखाई (रोहड़ू)। कोटखाई में सर्वहितकारी ब्राह्मण सभा समाज की बैठक हुई। सभा समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि तुलसी पूजन से अपनी संस्कृति को सहेजें। कहा कि सभी वर्गों से विशेषकर दिसंबर के अंत में होने वाले आयोजनों में जिस प्रकार पाश्चात्य संस्कृति हावी हुई है, उसने हमारे बच्चों को अपनी जड़ों से दूर कर दिया है। जहां एक ओर प्लास्टिक के निर्जीव वृक्षों को सजाकर उत्सव मनाए जा रहे हैं, वहीं हमारी जीवंत और प्राणदायिनी परंपराएं कहीं ओझल होती जा रही हैं। पिछले एक दशक से अधिक समय से तुलसी पूजन दिवस एक वैचारिक क्रांति के रूप में उभरा है। 25 दिसंबर को तुलसी पूजन मनाना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और स्वास्थ्य के प्रति हमारी जागरूकता का प्रतीक है। तुलसी का पौधा सनातन धर्म में केवल लक्ष्मी का स्वरूप ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद की दृष्टि से एक संजीवनी भी है। सर्वहितकारी ब्राह्मण सभा समाज के सभी वर्गों से यह आह्वान किया है कि वे पाश्चात्य दिखावे को त्यागकर अपनी गौरवशाली विरासत पर गर्व करें।