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Rampur Bushahar News: मां तूना काली 200 वर्ष पुरानी प्रथा को लेकर रथ यात्रा पर निकली

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माता तूना काली चेवर रथ यात्रा पर निकलने से पहले देवलुएं के साथ
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कोटखाई क्षेत्र में दो माह के भ्रमण पर रहेगी माता
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संवाद न्यूज एजेंसी


कोटखाई (रोहड़ू)। मां तूना काली चेवर 200 वर्ष पुरानी प्रथा को निभाते हुए छह वर्ष बाद रविवार सुबह कोटखाई क्षेत्र के भ्रमण पर निकली है। मां की यात्रा से क्षेत्र में रुके देव यज्ञ पूर्ण होंगे। मां तूना काली के साथ चलने वाले लोगों के लिए यह यात्रा काफी मुश्किल भरी रहती है। करीब 22 लोग इस रथ यात्रा में शामिल हैं। माता के पुजारी रामानंद शर्मा के अनुसार, इस यात्रा में सभी यात्री नंगे पैर यात्रा करेंगे। वे बारिश हो या धूप सिर के ऊपर कोई आवरण (छाता) नहीं ले सकते हैं। प्रथा के अनुसार, माता के रथ के साथ भेड़-बकरियां भी होती है, जो मां के रथ के साथ चलती हैं। मां तूना काली का रथ दो-तीन दिन चेवर गांव में ही रहेगा। उसके बाद चार जुलाई को शवाल नामक स्थान से सभी यात्री गण के साथ क्षेत्र के भ्रमण पर निकलेगा। कोई भी व्यक्ति माता के रथ को नहीं छू सकता है। माता का रथ सिर्फ पुजारी और माता के गुरु ही उठा सकते हैं। लोगों को माता के रथ से लगभग 20 से 30 मीटर की दूरी पर रहना पड़ता है। किसी भी व्यक्ति को नजदीक आने की इजाजत नहीं होती है। यह परंपरा 200 वर्ष से चल रही है, जिसे निभाने के लिए माता भ्रमण पर निकली है। मां तूना काली के खिण (विशेष देव पूजा) करने के लिए आज से ही लोग बुकिंग करवाने लग गए हैं। छह वर्ष वर्ष से लोगों के देव कार्य रुके हुए थे, जो इस बार पूरे होंगे। रविवार को सैकड़ों लोगों ने माता के दर्शन किए और मंदिर में भंडारा भी ग्रहण किया। क्षेत्र के लोगों ने माता को चुनरी और बली के रूप में गिरी गोला अर्पण किया।
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