कुल्लू दशहरे में आउटर सिराज के देवी देवताओं के की जलेब में शामिल होते लोग
पांचवें दिन की जलेब में आउटर सिराज के छह देवताओं ने लिया भाग
नाचते-गाते हुए आनी क्षेत्र के लोगों ने जलेब में लिया भाग
आनी ( कुल्लू )। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के पांचवें दिन भगवान नरसिंह की जलेब निकाली गई। जलेब में आउटर सिराज के पांच देवताओं ने लाव-लश्कर के साथ भाग लिया। शाम चार बजे के बाद निकाली जलेब में ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवताओं के साथ देवलू भी झूमे। इसमें आउटर सिराज के देउरी खुड़ीजल, ब्यास ऋषि कुयरी, कोट भझारी कोट, टकरासी नाग टकरासी, चोतरूनाग देवताओं ने लाव-लश्कर के साथ भाग लिया। जलेब जहां से गुजरी वहां भव्य दृश्य को देखने के लिए लोग उमड़े। इस दौरान देवता के साथ देवलू भी झूम उठे। जलेब में भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबदार महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार हुए। देवताओं के साथ देवलुओं को वाद्ययंत्रों की थाप थिरकने से ढालपुर का माहौल देवमय बन गया। यह जलेब की शुरुआत भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर से हुई। जलेब में सबसे आगे भगवान नृसिंह की घोड़ी चलती है। उसके पीछे देवताओं के बंजतरी चलते हैं। राजा की पालकी के आगे दो देवता और दो देवता पालकी के दाएं बाएं चलते हैं। दो देवता पालकी के पीछे चलते हैं। इस दौरान देवलु नाटी डालते हुए झूम उठे और देवता भी देवलुओं के साथ झूम उठे। आउटर सिराज की जलेब में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। उसके पीछे जलेब का काफिला चला। जलेब कलाकेंद्र के पीछे से ढालपुर चौक होते हुए वापस राजा की चानणी में समाप्त हुई। सभी देवताओं ने भगवान नरसिंह की मौजूदगी में ढालपुर मैदान की किलाबंदी की, जिसमें बुरी शक्तियों का दमन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया गया।