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Rampur Bushahar News: कुपवी में 28 पोष तक मनाना अनिवार्य होता है माघी पर्व

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नेरवा (रोहड़ू)। माघी पर्व की शुरुआत पौष मास की संक्रांति के दिन हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि पुराने समय में सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी होती थी। इस कारण लोग कई महीनों का राशन, पशुओं के लिए घास और जलाने के लिए लकड़ियां पहले से ही एकत्रित करके रख लेते थे। भारी बर्फबारी के कारण जन जीवन थम सा जाता था। वैसे इसे कहते तो माघी पर्व है, लेकिन बकरे सिर्फ पौष के महीने में ही कटते हैं। चौपाल उपमंडल में तो क्षेत्रों में अलग-अलग दिन पर्व मनाया जाता है, जबकि कुपवी उपमंडल में अधिकांश स्थानों पर एक ही तिथि यानी 27 पौष को माघी पर्व मनाया जाता है। कुपवी उपमंडल के कफलाह गांव के निवासी सतपाल चौहान ने बताया कि मंगलवार और वीरवार को बकरे नहीं काटे जाते हैं। यदि पर्व मंगलवार को वीरवार के दिन पड़ता है, तो एक दिन पहले बकरे कटते हैं। यदि कोई दुर्घटना या मृत्यु हो जाए, तो पर्व की तिथि आगे बढ़ा दी जाती है। फिर भी 28 पौष तक हर हालत में पर्व मनाना पड़ता है। इसके बाद बकरे नहीं काटे जाते। पर्व वाले दिन सगे-संबंधियों और परिचितों को आमंत्रित किया जाता है, जो लोग किसी कारण इस दिन नहीं आ पाते हैं, वह माघ के महीने में आते हैं। सदियों से मीट को सूखा कर रखने की परंपरा है। माघ के महीने में लोग अपने परिचितों को अपने घर आमंत्रित कर उन्हें सुखाया हुआ मीट परोसते हैं। पर्व में केवल मीट ही नहीं परोसा जाता। शाकाहारियों के लिए सिड्डू, खिंडा, पोलड़ू, मशाला और भात आदि व्यंजन परोसे जाते हैं। कुछ शाकाहारी समुदाय जैसे धार चांदना व बाबत पंचायतों के पाबुच ब्राह्मण भी पर्व मनाते हैं, लेकिन यह लोग मेहमानों को परंपरागत शाकाहारी व्यंजन परोसते हैं। पौष मास को पापी महीना भी कहा जाता है। इस माह शादी या कोई भी अन्य शुभ कार्य नहीं होते। माघ की संक्रांति यानी मकर संक्रांति से शुभ कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं।
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