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Rampur Bushahar News: आनी में किसान सभा ने कब्जे की जमीन से बेदखली के खिलाफ निकाली रैली

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आनी में किसान सभा जमीन से बेदखली के खिलाफ रैली निकाल कर रोष प्रकट करते हुए
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भेजा ज्ञापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। किसानों की कब्जे की जमीन से बेदखली के विरोध में सोमवार को हिमाचल किसान सभा की आनी इकाई ने प्रदर्शन किया। पूर्व प्रदेश सचिव डॉ. ओंकार शाद के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विश्राम गृह से लेकर आनी कस्बे के मुख्य बाजार होते हुए तहसीलदार कार्यालय तक रैली निकाली। तहसीलदार कार्यालय के बाहर डॉ. शाद और किसान सभा के आनी अध्यक्ष प्रताप ठाकुर ने रैली को संबोधित करते हुए किसानों की समस्याओं को उठाया। उसके बाद किसान सभा ने सेब उत्पादक संघ के जरिये तहसीलदार रतनेश्वर शर्मा को ज्ञापन सौंपा, जिसे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भेजा गया। ज्ञापन में कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बाबू राम बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में भूमि से बेदखली को अवैध करार दिया है और बिना उचित आदेश के की गई बेदखली को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना है। इसके बावजूद राज्य के विभिन्न हिस्सों में बिना उचित प्रक्रिया के मकानों को सील किया जा रहा है, जिसमें नौतोड़ नीति के तहत स्वीकृत मकान भी शामिल हैं। किसान सभा ने यह भी बताया कि साल 2000 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने भूमि राजस्व अधिनियम 1963 में धारा 163ए जोड़कर अतिक्रमित सरकारी भूमि के नियमितीकरण के लिए प्रावधान किया था। करीब 1,67,339 किसानों ने इस अधिनियम के तहत आवेदन किए थे, लेकिन उनकी याचिकाएं अब भी उच्च न्यायालय में लंबित हैं। फिर भी किसानों को भूमि खाली करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं। सभा ने मांग की कि बेकार और बंजर भूमि को वन अधिनियमों की परिभाषा से बाहर किया जाए और सभी बेदखली पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को 10 बीघा तक भूमि दी जाए और भूमिहीन और गरीब किसानों को कम से कम 5 बीघा कृषि भूमि आवंटित की जाए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूमिहीनों को दो और तीन बिस्वा भूमि प्रदान करने की भी मांग उठाई गई। सभा ने 2023 की आपदा में घर गंवाने वालों को 7 लाख रुपये मुआवजा देने और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत किसानों को अधिग्रहीत भूमि का चार गुना मुआवजा देने की भी मांग उठाई है।
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