कागजों में सिमटी योजनाएं, सड़कों पर भटक रहे खुले छोड़े पशु
चौपाल उपमंडल की सड़कों और बाजारों में घूम रहे सैकड़ों पशु
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। खुले में छोड़े पशुओं के संरक्षण के लिए सरकार समय-समय पर कई योजनाएं बनाती हैं, लेकिन धरातल पर इनका प्रभाव नजर नहीं आ रहा। पशुधन संरक्षण के नाम पर शराब पर कर भी लगाया गया है। इसके बावजूद पशुओं को खुले में छोड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है। चौपाल उपमंडल की सड़कों और बाजारों में आज भी पशु घूमते देखे जा सकते हैं। इनमें टैग लगे भी शामिल हैं। नेरवा-फेडिज पुल-मीनस मार्ग पर बड़ी संख्या में पशु घूमते हैं। वहीं, चौपाल-शिमला मार्ग पर रियुणी और देहा के बीच भी इनकी संख्या काफी अधिक है। दिन के समय पशु सड़क किनारे जंगलों में घास चरते हैं, जबकि रात को जंगली जानवरों से बचने के लिए सड़क पर झुंड बनाकर खड़े हो जाते हैं। रियुणी और देहा के बीच सर्दियों में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। ऐसे में खुले में रहने वाले इन पशुओं के लिए कड़ाके की ठंड जानलेवा साबित होती है। कई पशु ठंड के कारण दम तोड़ देते हैं, जबकि कुछ जंगली जानवरों का शिकार बन जाते हैं। सड़क के किनारे इनके कंकाल भी देखे जा सकते हैं। नेरवा, चौपाल, चंबी, कुपवी, झिकनी पुल, दवड्डा, बानी और गुम्मा सहित अन्य बाजारों में भी खुले में छोड़े पशुओं की भरमार है। भूख से परेशान पशु दुकानों के बाहर रखे खाद्य पदार्थों के साथ कागज, पॉलिथीन और अन्य कचरा तक खा रहे हैं। कई बार ये वाहन दुर्घटनाओं का शिकार होकर घायल हो जाते हैं। खेतों और बगीचों में घुसकर फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। स्थानीय लोगों ने खुले छोड़े पशुओं के संरक्षण और पुनर्वास के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि केवल योजनाएं बनाने के बजाय उनका धरातल पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।