यही स्थिति रही तो इस वर्ष फल उत्पादन पर पड़ेगा सीधा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बारिश और मौसम में अचानक आए बदलाव से बढ़ी ठंड ने सेब उत्पादन पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इन दिनों मध्यम ऊंचाई वाले सेब के बगीचों में फूल खिल चुके हैं, लेकिन इसी संवेदनशील समय पर हो रही बारिश बागवानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। बागवानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो इस वर्ष फल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ भी लगातार ठंड को बागवानी के लिए प्रतिकूल मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सेब में फूल आने और परागण की प्रक्रिया के दौरान सूखा और सामान्य तापमान बेहद जरूरी होता है। लगातार बारिश से परागण प्रभावित होता है, क्योंकि मधुमक्खियां और अन्य परागण करने वाले कीट सक्रिय नहीं हो पाते हैं। इसके अलावा अधिक नमी के कारण फूलों में फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे फूल झड़ने की आशंका रहती है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय तापमान सामान्य से कम होने के कारण फूलों की वृद्धि धीमी हो जाती है और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। यदि तापमान लंबे समय तक कम बना रहता है, तो फल की सेटिंग कम हो सकती है। इससे उत्पादन में गिरावट आना तय है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. उषा शर्मा का कहना है कि बागवान बारिश के दौरान फंगस रोगों से बचाव के लिए बगीचों में आवश्यक दवाओं का छिड़काव समय-समय पर करें। जहां संभव हो मधुमक्खियों के बॉक्स स्थापित कर परागण को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अधिक खराब मौसम और तापमान में गिरावट से फूल खिले बगीचों में फसल के प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। प्रदेश किसान मंच के प्रदेश संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि इस साल बगीचों में बहुत कम मात्र में फूल नजर आ रहे हैं। पहले ही मौसम की मार बागवान झेल रहे हैं। अब इस तरह की लगातार बारिश उनकी मेहनत पर पानी फेर सकती है। सरकार और विभाग इस स्थिति पर नजर रखते हुए बागवानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता प्रदान करे। यदि मौसम में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इस साल सेब उत्पादन में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर बागवानों की आर्थिकी पर पड़ेगा।