सूखे के बाद सेब के पौधों के तनों में नजर आने लगे निशान। संवाद
टहनियों पर लाल रंग और तनों पर तेल जैसे धब्बे नजर आ रहे
बागवानों ने विभाग से विशेषज्ञ भेजने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)।
क्षेत्र में लगातार पड़ रहे सूखे ने बागवानों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने से मिट्टी में नमी की भारी कमी आ गई है। इससे सेब के पौधों पर प्रतिकूल असर दिखाई देने लगा है। बागवानों का कहना है कि कई बगीचों में सेब के पौधों की टहनियों पर लाल रंग आ गया है, जबकि तनों पर तेल जैसे धब्बे नजर आ रहे हैं। ये किसी रोग के प्रकोप या फिर पोषक तत्वों की कमी के लक्षण हैं, जिससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय बागवान सूरत राम, सुभाष चौहान, सुरेंद्र शर्मा, प्रभु दयाल और पदम चौहान के अनुसार सूखे की स्थिति के चलते पौधों की जड़ें कमजोर हो रही हैं, जिससे उनका विकास रुक गया है। इसका सीधा प्रभाव न केवल मौजूदा बगीचों पर पड़ रहा है, बल्कि आने वाली फसलों पर भी खतरा मंडराने लगा है। जो पौधे पहले से ही किसी बीमारी की चपेट में थे, अब तेजी से सूखने लगे हैं। यदि हालात समय रहते नहीं सुधरे, तो आने वाले वर्षों में सेब उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। बागवानों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। कभी असमय बारिश, कभी ओलावृष्टि और कभी लंबे समय तक पड़ने वाला सूखा बागवानी को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बागवानों ने बागवानी विभाग से मांग की है कि विशेषज्ञ को भेजकर सेब के पौधों में दिख रहे लक्षणों की जांच करें और उचित दिशा-निर्देश जारी करें। साथ ही सूखे से निपटने के लिए प्रभावी सिंचाई सुविधाएं, जल संरक्षण उपाय और राहत योजनाओं को प्राथमिकता देने की आवश्यकता जताई गई है, ताकि बागवानी को इस संकट से उबारा जा सके। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बागवानों ने बागवानी विभाग से मांग की है कि विशेषज्ञ को भेजकर सेब के पौधों में दिख रहे लक्षणों की जांच करें और उचित दिशा-निर्देश जारी करें। साथ ही सूखे से निपटने के लिए प्रभावी सिंचाई सुविधाएं, जल संरक्षण उपाय और राहत योजनाओं को प्राथमिकता देने की आवश्यकता जताई गई है।