. विद्यार्थियों की पढ़ाई होगी प्रभावित, शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा प्रतिकूल प्रभाव
. चेताया, सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो संघ इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला शिमला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह लक्टू, महासचिव आकाशदीप शर्मा, चीफ पैटर्न जेपी पराशर, उप प्रधान सुरेश कंवर, कोषाध्यक्ष गगन चौहान, मुख्य सलाहकार डॉ. विनोद मेहता ने जारी संयुक्त बयान में प्रदेश सरकार से जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों व कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ न डालने की मांग उठाई है।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले महीने ही नगर निकाय और पंचायत चुनाव हुए हैं, जिसमें शिक्षकों की व्यापक स्तर पर ड्यूटी लगाई गई थी। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरे माह प्रभावित हुई है और शिक्षा-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब सरकार की ओर से शिक्षकों की जनगणना कार्य के लिए नियुक्ति की जा रही है, जोकि छात्र हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण एवं जटिल कार्य है, जिसके अंतर्गत भवन सूचीकरण, घर-घर सर्वेक्षण, नक्शा निर्माण, अभिलेख सत्यापन, डिजिटल डाटा एंट्री, त्रुटि सुधार, पर्यवेक्षक और रिपोर्टिंग जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। ऐसे व्यापक और समयबद्ध राष्ट्रीय अभियान में शिक्षकों की नियुक्ति करना और विद्यालय समय के बाद जनगणना कार्य को संपन्न करना अत्यंत दुष्कर कार्य है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है और ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में गणनाकारों को बिखरी हुई बस्तियों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है। सीमित समय में कार्य पूर्ण करने के दबाव से आंकड़ों में त्रुटियां, अपूर्ण कवरेज और सत्यापन संबंधी कमियां आने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे जनगणना आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। जिला स्कूल प्रवक्ता संघ ने मांग की है कि जनगणना कार्य के लिए पंचायतों, शहरी निकायों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर और अन्य फील्ड स्तरीय कर्मचारियों की सेवाओं अथवा स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से भी जनगणना का कार्य करवाया जाए। शिक्षकों को छात्र हित में जनगणना कार्य से मुक्त रखा जाए, ताकि उनकी पढ़ाई किसी प्रकार से बाधित न हो। जिला प्रवक्ता संघ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाने का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संघ इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने पर विचार करेगा।