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Rampur Bushahar News: जंगलों में नहीं मिल रही गुच्छी, मंदी में रोहड़ू मेले का बाजार

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गुच्छी बेचने के बाद मिले पैसों से ग्रामीण करते थे मेले में खूब खरीदारी
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रोहड़ू। राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले में कारोबार के लिए बाहर से पहुंचे व्यापारियों को मंदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। बाजार में गुच्छी नहीं पहुंचने के कारण अभी तक नौ दिन में कारोबारियों का कारोबार चौपट नजर आ रहा है। अब कारोबारियों को आधे समय में कर्मचारियों के वेतन मिलने के बाद कारोबार की उम्मीद है। रोहड़ू मेले के दौरान हर साल लाखों रुपये की गुच्छी का कारोबार होता था। ग्रामीण क्षेत्र से लोग जंगलों से गुच्छी तलाश कर बेचने के लिए रोहड़ू मेले में पहुंचते थे। गुच्छी बेचने के बाद मिले पैसों से मेले में खूब खरीदारी करते थी। मेले के दौरान गुच्छी चौदह से पंद्रह हजार रुपये प्रति किलो बिकती रही है, लेकिन इस बार गुच्छी के दाम साढ़े तीन से चार हजार रुपये है। वहीं, बाजार में गुच्छी पहुंच नहीं रही है। राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले के लिए कमेटी ने 20 अप्रैल से नौ मई तक अस्थायी दुकानें लगाने का समय दिया है। कंबल के कारोबारी रजाक और शाजिद का कहना है कि कमाई की उम्मीद लेकर बैठे है, लेकिन दुकानों का किराया भी पूरा नहीं होने की संभावना हैं। गुच्छी के व्यापारी संजय कहते हैं कि इस बार गुच्छी जंगलों बहुत कम मिल रही है। बाजार में भी तीन से चार हजार रुपये किलो के दाम मिल रहे। इस कारण लोगों ने अब तलाश बंद कर दी है। राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग कपड़े, बर्तन और अन्य सामान खरीदते हैं। इस बार व्यापारी मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले में प्लास्टिक, बर्तन, कपड़े, रेडिमेड कपड़ों का कारोबार होता है, जबकि प्रशासन ने व्यापारियों को दुकानें बीते साल की तुलना में इस बार बहुत कम किराये पर दी हैं। - संवाद
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