फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rampur Bushahar News: सेब बगीचों में सूखा और मौसम की मार, बागवानों की चिंता बढ़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
संकट में बागवानी, नए पौधे लगाने पर भी लगी ब्रेक
विज्ञापन


पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने के कारण घट रहा सेब का उत्पादन

संवाद न्यूज एजेंसी

आनी (कुल्लू)। सेब बगीचों में काम करने वाले बागवानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी हो चुकी हैं। बागवानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से बारिश और बर्फबारी की कमी ने बागवानी के काम को मुश्किल बना दिया है। यह कमी सेब बगीचों में खाद डालने और उनकी देखभाल के कार्य को भी प्रभावित कर रही है। हालांकि, इन दिनों बागवान अपने बगीचे में काट-छांट के कार्य में जुटे हैं, लेकिन समय पर बारिश न होने के चलते नए पौधे लगाने का कार्य लटका हुआ है। पिछले कुछ वर्षों से बारिश और हिमपात का समुचित स्तर घटने के कारण सेब के बगीचों में सूखा पड़ा हुआ है। इससे बागवानों के लिए यह मुश्किल हो गया है कि वे बगीचों में समय पर खाद डाल सकें या पौधों की देखभाल सही तरीके से कर सकें। सूखे के कारण बागवानों को हर साल अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पहले जहां सेब के बगीचे अच्छी फसल देते थे, अब वही बगीचे सूखने लगे हैं। इसके परिणाम स्वरूप बागवानों को हर साल उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से बिना पर्याप्त बारिश के बगीचों में उपज कम हो रही है। इस कारण किसानों-बागवानों की चिंता और बढ़ गई है। इसके अलावा कम बारिश और बर्फबारी का प्रभाव सिर्फ फसल पर नहीं, बल्कि बागवानी के अन्य कार्यों पर भी पड़ा है। खाद डालने का काम भी मौसम की अनुकूलता के हिसाब से लटका हुआ है। बागवानों का कहना है कि बारिश और बर्फबारी की कमी से बगीचों की मिट्टी में नमी नहीं रह पा रही है। इससे पौधों को सही पोषण नहीं मिल रहा है। इस कारण बागवानों को हर साल अपनी मेहनत का उतना अच्छा फल नहीं मिल पा रहा है, जितना पहले मिलता था। बागवानी क्षेत्र में आने वाली इस परेशानी का समाधान अब समय की आवश्यकता बन गया है। यदि इस पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में बागवानी पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। इसके लिए सरकार और संबंधित विभागों को बागवानी क्षेत्र में जल संचयन, सिंचाई व्यवस्था और अन्य उपायों को प्रभावी बनाना होगा, ताकि बागवानों को सूखे और मौसम की कमी से राहत मिल सके। बागवान फिर से अच्छे उत्पादन की ओर लौट सकें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें