प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने वाले आनी और निरमंड के बागवाने विशेषज्ञों के साथ। संवाद
आनी और निरमंड के बागवान पांच दिवसीय शिविर में ले रहे नवीन तकनीकों की जानकारी
डॉ. राकेश ने सेब और फलदार पौधों में पाई जाने वाली बीमारियों के बारे में बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)।
बदलते मौसम और आधुनिक खेती तकनीकों के युग में वैज्ञानिक प्रबंधन ही फसलों के उत्पादन एवं गुणवत्ता बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। पौधों को समय पर और संतुलित पोषक तत्व मिलने से न केवल उनकी वृद्धि बेहतर होती है, बल्कि उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ जाती है। बागवानी विभाग के पांच दिवसीय शिविर के दूसरे दिन डॉ. रमेश राणा ने पौधों की देखभाल, पोषक तत्व प्रबंधन, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। साथ ही मृदा परीक्षण, उर्वरकों की मात्रा एवं समयबद्ध आपूर्ति की उपयोगिता पर जोर दिया। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा में बागवानी विभाग की ओर से प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। शिविर में आनी और निरमंड ब्लॉक के 15 बागवानों को सेब की उच्च घनत्व खेती से संबंधित नवीन तकनीकों की जानकारी प्रदान की जा रही है, ताकि वे आधुनिक व वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि कर सकें। शिविर में डॉ. राकेश ने सेब और अन्य फलदार पौधों में पाई जाने वाली सामान्य बीमारियों, उनके लक्षणों और बचाव के उपायों पर जानकारी दी। उन्होंने फलों की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कीटों और रोगों की पहचान के साथ उनके समन्वित प्रबंधन (आईपीएम) के बारे में भी मार्गदर्शन दिया। डॉ. विजय भारद्वाज ने बागवानों को भूमि चयन, पौधों की किस्मों का चुनाव, विशेषकर हाई डेंसिटी सेब पौधों की आधुनिक किस्मों और उन्हें लगाने की वैज्ञानिक विधियों के बारे में उपयोगी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही किस्म का चयन और वैज्ञानिक तरीके से पौधारोपण करने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। डॉ. अभय शर्मा ने बदलते मौसम के प्रभावों पर चर्चा करते हुए बताया कि मौसम परिवर्तन के अनुरूप बागवान कैसे अपनी बागवानी पद्धतियों में आवश्यक परिवर्तन कर सकते हैं। उन्होंने तापमान में उतार-चढ़ाव, वर्षा पैटर्न और सूखा परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली सावधानियों और तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया।