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Rampur Bushahar News: राई नाग देवता के मंदिर में गढ़ाई पर्व, ग्रामीणों ने जाना फलादेश

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निरमंड के राई नाग देवता मंदिर में गढ़ाई पर्व पर देवता के गुर से फलादेश सुनते ग्रामीण। संवाद
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ग्रामीणों ने जाना फलादेश, देथवा में दो साल बाद हुआ पूजन
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निरमंड(कुल्लू)। उपमंडल निरमंड के देथवा गांव में बुधवार को देवता साहिब राई नाग स्वर्ग प्रवास से लौटे। देव आगमन के साथ ही मंदिर में विशेष गढ़ाई पर्व धूमधाम से शुरू हुआ। राई नाग क्षेत्र के गढ़पति देवता हैं। देवता का प्रभाव क्षेत्र तिंदर जवागी से लेकर बुशैहर के बौंडा फैला है। राई नाग देवता के मूल देवरा मंदिर में प्रति वर्ष दो महत्वपूर्ण पर्वों जागरा का आयोजन पौष और चैत्र में किया जाता है, जिसमें गूर देवता के माध्यम से साल भर का फलादेश सुनाते हैं। हर तीसरे वर्ष विशेष रूप से मगैणी जोत में जाकर काली पूजन का विधान है। मूल देवरा में क्षेत्र के समस्त देवी देवता शक्ति प्राप्त करने के लिए आते हैं। क्षेत्र के नौ नागों से संबंधित सभी कार्यों के लिए राई नाग देवता स्वयं खेल करके कार्य की अनुमति प्रदान करते हैं। इस वर्ष के पर्व में कई महत्वपूर्ण भविष्यवाणियां की गईं। देवता ने संकेत दिया कि इस वर्ष ओलावृष्टि की संभावना है और साथ ही फसल मध्यम स्तर की होगी। माता अंबिका तो हारी हैं। साथ ही राई नाग देवता के गुरु माटी सिम देवता कोट हैं, वे भी इस वर्ष हारे हैं और पांच वीर ढौण के जीतने की भी भविष्यवाणी की गई। राई नाग के गुर देवता के रूप में माटी सिम कोट की पूजा की जाती है। मान्यता है कि निरमंड क्षेत्र की प्रसिद्ध अंबिका माता अगर किसी कारणवश अपनी प्रजा या हारयान से रुष्ट हों तो वे अपने भाई राई नाग देवता के मूल देवरा मंदिर में प्रवास करने आती हैं। देवता माटी सिम का गढ़ाई पर्व वीरवार को कोट मंदिर में होगा। यह पर्व स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लोगों की आस्था और विश्वास को दर्शाता है।
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