पांच गांवों में सामुदायिक मध्यस्थता से सुलझेंगे विवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने सामुदायिक मध्यस्थता : मुकदमा-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर अभियान शुरू किया है। इसमें शिमला जिले के पांच गांवों का चयन किया गया है। इनमें शोघी, माझोटली, मगावटा, पत्रोग और डूंगसा गांव शामिल हैं। अभियान का उद्देश्य पारिवारिक, पड़ोस, जमीन की सीमा और लेन-देन से जुड़े विवादों को सुलझाना है। यह कार्य सामुदायिक मध्यस्थों के माध्यम से आपसी बातचीत और सहमति से किया जाएगा। मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक और गोपनीय रहेगी। जो गांव लगातार बारह माह तक कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं करेगा, उसे मुकदमा-मुक्त गांव घोषित किया जाएगा। इसका लक्ष्य ग्रामीणों को छोटे विवादों के लिए अदालत जाने के बजाय आपसी सहमति से समाधान के लिए प्रेरित करना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिमला के सचिव उमेश वर्मा ने ग्रामीणों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है। वर्मा ने कहा कि इससे समय और संसाधनों की बचत होगी। ग्रामीणों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से भी राहत मिलेगी। यह पहल छोटे-छोटे विवादों को गांव स्तर पर ही निपटाने में मदद करेगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों में सौहार्द बढ़ाना है।