संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। किन्नौर जिले के खिमलोगा दर्रे में फंसे ट्रैकर और पोर्टर के छह सदस्यीय दल को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बेस कैंप तक पहुंचा दिया है। यह सभी खिमलोगा दर्रे में फंसे थे। रेस्क्यू टीम में 35 लोग शामिल है।
ट्रैकरों का यह दल एक सितंबर को उत्तरकाशी से खिमलोगा दर्रे की तरफ निकला था और दो सितंबर को दर्रे में फंस गए थे। सोमवार को दिनभर चले बचाव अभियान के बाद एक घायल ट्रैकर और चार पोर्टरों को सुरक्षित निकाला गया। मंगलवार को इन्हें सांगला पहुंचाया जाएगा। रोप रैपलिंग का शौक रखने वाले पश्चिम बंगाल के तीन ट्रैकर और छह पोर्टर छितकुल तथा उत्तराखंड की सीमा पर खिमलोगा दर्रे में फंस गए थे। इनमें एक ट्रैकर की मौत हो गई थी जबकि एक घायल ट्रैकर और दो पोर्टर खिमलोगा दर्रे से सुरक्षित निकलकर सांगला वैली पहुंच गए थे। इन्होंने ही इस हादसे की सूचना प्रशासन को दी थी।
छितकुल में प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को पुलिस थाना सांगला पहुंचाया गया। इसके बाद रविवार को जिला प्रशासन की अगुवाई में आईटीबीपी, पुलिस, होमगार्ड और क्यूआरटी का दल खिमलोगा दर्रे में बचाव अभियान के लिए रवाना हुआ। ट्रैकरों ने पूछताछ में बताया कि दो सितंबर को 5,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खिमलोगा दर्रे में रोप रैपलिंग के दौरान दो ट्रैकर गिर गए थे। इसमें से एक ट्रैकर की मौके पर ही मौत हो गई थी। ट्रैकर के शव को निकालने के लिए आईटीबीपी और सेना के पोर्टर जुटे हैं लेकिन कठिन परिस्थितियों के चलते सोमवार को शव नहीं निकाला जा सका।
एसडीएम कल्पा डॉ. शशांक गुप्ता ने बताया कि खिमलोगा दर्रे में सोमवार को दिनभर बचाव अभियान चलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैकर और पोर्टरों को सुरक्षित बेस कैंप तक पहुंचा दिया है। मंगलवार को इन्हें सांगला पहुंचाया जाएगा। शव को घटनास्थल से बाहर निकालने के लिए आईटीबीपी और सेना के पोर्टरों की मदद ली जा रही है।