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चौपाल की जनता को कब मिलेगा बिजली समस्या से छुटकारा

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नेरवा (रोहड़ू)। उपमंडल चौपाल की जनता को बिजली समस्या से निजात नहीं मिल रही है। हजारों लोगों की सर्द रातें आज भी अंधेरे में कट रही हैं। बिजली की समस्या से निजात दिलवाने के लिए वर्ष 2012 में हिमाचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने चौपाल के लास्टाधार में 66 केवी सबस्टेशन का शिलान्यास किया था। आठ साल में इसका 25 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हो पाया है। विद्युत सबस्टेशन 23 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से बन रहा है। इसके तहत 69 टावर लगने हैं। इनमें से 41 सरकारी, जबकि 28 टावर निजी भूमि में लगाए जाने हैं। सरकार ने भूमि मालिकों को मुआवजा 2015-2016 में दे दिया है। परियोजना में कार्य करने वाली कंपनी वर्ष 2017 में कार्य छोड़ चुकी है, जबकि उसकी सहयोगी कंपनी ने भी वर्ष 2018 में 25 प्रतिशत कार्य होने के बाद काम बंद कर दिया था। अब स्थिति यह है कि इस परियोजना का सारा कार्य ठप पड़ा हुआ है। चौपाल के चुने हुए कमजोर नेतृत्व की कमजोर इच्छाशक्ति का खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। शिलान्यास के बाद प्रदेश मेें तीन बार सत्ता परिवर्तन हो चुका है लेकिन निर्माण कार्य में कोई तेजी नहीं आई है। ग्राम पंचायत देवत के पूर्व प्रधान योगेश अजटा ने आरोप लगाया कि जनता को इस परियोजना के नाम पर बेवकूफ बनाया जा रहा है। उन्होंने चौपाल के विधायक पर भी झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चौपाल के कमजोर नेतृत्व के कारण यह परियोजना वर्षों से लटकी पड़ी है, जिसका खामियाजा अंधेरे में रहकर चौपाल की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस परियोजना के कार्य को जल्द शुरू किया जाए।
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