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Rampur Bushahar News: स्पीति के गांवों में सुरक्षित पर्यावरण के लिए कीटों के जैव नियंत्रण पर मंथन

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विशेषज्ञों ने सेब के विभिन्न कीटों, हानिकारक लक्षणों और पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन के बारे में किसानों को किया जागरूक
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संवाद न्यूज एजेंसी
काजा (लाहौल-स्पीति)। स्पीति घाटी के लालुंग, धनखड़, कुंगरी और टिंगटी गांवों में कीटों के जैव नियंत्रण पर प्रशिक्षण शिविर लगाए गए। डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन के कीट विज्ञान विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र ताबो के सहयोग से शिविर लगाए। इसमें 60 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कीट विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा मुख्य वक्ता थे। उन्होंने सेब और अन्य शीतोष्ण फसलों के कीटों के प्रबंधन के लिए जैव नियंत्रण रणनीति अपनाने पर बल दिया। उन्होंने प्रदेश के शुष्क समशीतोष्ण क्षेत्र में कीटनाशकों और अन्य रसायनों के उपयोग के प्रति आगाह किया। किसानों को सेब के विभिन्न कीटों, उनके हानिकारक लक्षणों और पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र ताबो की फल वैज्ञानिक डॉ. अंकिता धीमान ने सेब के बागों के उच्च घनत्व वाले रोपण में क्लोनल रूट स्टॉक और सीडलिंग रूट स्टॉक के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने सेब की फसल में प्रशिक्षण, छंटाई और पोषक तत्व प्रबंधन के लिए विभिन्न उपाय सुझाए। इसके अलावा, डॉ विश्व गौरव सिंह चंदेल ने आक्रामक कीटों के लक्षणों और उनके प्रबंधन के साथ-साथ नुकसान की क्षमता पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों ने स्थानीय किसानों के खेतों का भी दौरा किया और फसल में देखी गई विभिन्न बीमारियों के लक्षणों और प्रबंधन पर चर्चा की। डॉ. सुभाष वर्मा ने डॉ. आरएस. स्पेहिया, वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख, केवीके ताबो को इन गांवों के किसानों के साथ बैठक की व्यवस्था करने के लिए आभार जताया।
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