विद्युत बोर्ड पेंशनर फोरम कोटगढ़-खनेटी इकाई की बैठक में मौजूद सदस्य। स्रोत : इकाई
केंद्र सरकार से विधेयक को वापस लेने की उठाई मांग
बोर्ड से सेवानिवृत्त पेंशनरों के देय लाभ जल्द किए जाएं जारी : कंवर
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। विद्युत बोर्ड पेंशनर फोरम ने केंद्र सरकार की ओर से लाए गए बिजली संशोधन विधेयक का विरोध किया है। साथ ही फोरम ने सेवानिवृत्त पेंशनरों के देय लाभ जल्द जारी करने की मांग उठाई है। विद्युत पेंशनर कोटगढ़-खनेटी इकाई ने चेताया है कि यदि जल्द पेंशनरों के हितों को पूरा नहीं किया गया, तो इकाई आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड विद्युत पेंशनर फोरम कोटगढ़-खनेटी इकाई की बैठक मंगलवार को हुई। अध्यक्षता इकाई के सलाहकार आरडी सरकैक ने की। बैठक में सभी सदस्यों ने भाग लिया। बैठक शुरू होने से पहले फोरम के सदस्य स्व. शिव दयाल की आकस्मिक मृत्यु पर दो मिनट का मौन रखा गया। कोटगढ़-खनेरी इकाई के प्रधान सुंदर सिंह कंवर ने पेंशनरों के वित्तीय लाभ जैसे ग्रेच्युटी, लीव इन कैश और 2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को उनके संशोधित वेतन के वित्तीय लाभ तीन साल से लंबित रखने पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि यह प्रबंधक वर्ग का पेंशनरों के प्रति नकारात्मक रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देय लाभों का इसी प्रकार और विलंब होता रहा, तो हमें मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बहुत से पेंशनर अपने वित्तीय लाभ न मिलने से परेशानी झेल रहे हैं। बैठक में विनोद कुमार ने कहा कि आज बिजली संशोधन विधेयक-2025 पार्लियामेंट में लाया जा रहा है। इकाई इस बिल का कड़े शब्दों में विरोध करती है और नेशनल कार्डिनल कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एंप्लॉयज एंड इंजीनियर के आह्वान पर आगे भी विरोध करते रहेंगे। इकाई का मानना है कि यह बिल बोर्ड को निजी कंपनियों को देने का प्रयास किया जा रहा है। इस बिल में बिजली वितरण का काम अलग-अलग कंपनियों को देने का प्रावधान है, जिसके मद्देनजर सभी उपभोक्ताओं के घरों पर स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है। इनमें अलग-अलग कंपनियों की ओर से सप्लाई की गई बिजली की गणना की जा सकती है। ये मीटर कंपनी के हित को ध्यान में रखते हुए लगाए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं की क्रॉस सब्सिडी समाप्त हो जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दरों में वृद्धि होगी। इकाई ने केंद्र सरकार से इस बिल को तुरंत वापस लेने और स्मार्ट मीटर लगाना बंद करने की मांग की है।