आउटर सिराज के ढौड़ गढ़ से शक्तियां अर्जित कर लौटे देवता साहिब पांचवीर। संवाद
ढौड़ पहुंचकर कर हवन यज्ञ की दशकों पुरानी परंपरा का किया निर्वहन
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)। कोठी, ब्रामगढ़, झलैर के आराध्य देवता पांचवीर अपने मंदिर झलैर से अपने हरियान, हरियानों और लाव-लश्कर के साथ ज्येष्ठ गढ़ ढौड़ के लिए गए थे। रविवार को ढौड़ गढ़ में हवन यज्ञ कर और दैवीय शक्तियां प्राप्त कर देवता पांचवीर अपने मंदिर के लिए रवाना हुए। ढौड़ गढ़ अठारह गढ़ों में सबसे ज्येष्ठ गढ़ माना जाता है। यहां बड़े गणपति देवता शक्तियां अर्जित करते हैं और गढ़ पूजन के लिए आते हैं। देवता बूढ़ा सरोहणी बागा सराहन, खुड्डीजल देवता देहुरी आनी, श्रृंग ऋषि बंजार वैली समेत कई देवता यहां गढ़ पूजन और हवन यज्ञ के लिए पहुंचते हैं। कहा जाता है कि यहां पांचवीर पांडवों का स्वरूप माना जाता है। देवता के कारदार वेदराम और कमलेश ने बताया कि देवता ने नए रथ में विराजमान होकर पहली बार ज्येष्ठ गढ़ ढौड़ जाने की इच्छा गुरुवाणी के माध्यम से प्रकट की, जिसका देवलुओं ने देवता की आज्ञा के अनुसार निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि देवता साहिब के पुजारी शेर सिंह और पंडित रामलाल ने गढ़ में हवन यज्ञ किया और शक्तियां अर्जित कर अपने मंदिर के लिए रवाना हुए। इस अवसर पर कारदार वेदराम, गुर देवदास, मोहर सिंह, पुन्नू राम, सुंदर सिंह, मनु राम, नोया राम, दौलत राम सहित कई देवलू मौजूद रहे।